बागपत। आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के तीसरे दिन, अजितनाथ सभागार, पांडुशिला मैदान के वातानुकूलित हॉल बडौत में अजितनाथ विधान का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश से पधारे विधानाचार्य पंडित राजकिन्ग के निर्देशन मे श्रधालुओ ने गर्म प्रासुक जल से अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र हंस कुमार शुभम जैन को प्राप्त हुआ। आज पूजन मे देव शास्त्र गुरु पूजन, भगवान महावीर पूजन और दस लक्षण धर्म पूजन, नंदीश्वर दीप की पूजन की गयी। सौधर्म इंद्र शुभम जैन द्वारा मंडल पर 77 अर्घ समर्पित किये गए। संगीतकार अरुण जैन ग्वालियर के सुंदर भजनो पर जैन श्रधालुओ ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। विधान के मध्य मंगल प्रवचन देते हुए मुनि विशुभ्र सागर जी महाराज ने आज के धर्म उत्तम आर्जव धर्म के विषय मे बताया। उन्होंने कहा कि मन, वचन, काय की सरलता का नाम ही उत्तम आर्जव धर्म है। आर्जव धर्म मायाचार, छल कपट से बचाता है। मनुष्य का आधार जब तक छल कपट युक्त होगा, वह धर्म विहीन माना जाता है. सभा मे सुभाष जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, राकेश जैन, बाल्किशन जैन, विकास जैन,अनिल जैन आदि उपस्थित थे। शाम 6 बजे से मंदिर मे प्रतिक्रमण, आरती और जेएसवी अकेडमी के बच्चो के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमो की प्रस्तुति की गयी। पुरस्कार वितरण डॉक्टर प्रदीप जैन द्वारा किया गया। कल अजितनाथ सभागार मे मुनि सुव्रत नाथ विधान का आयोजन किया जायेगा।
