छठे नवरात्रे पर उपासक करेंगे मां कात्यायनी की उपासना

छठे नवरात्रे पर उपासक करेंगे मां कात्यायनी की उपासना

गुडग़ांव, (अशोक)। मां दुर्गा के छठे स्वरूप को कात्यायनी देवी
के नाम से जाना जाता है। धर्म पुराण में बताया गया है कि जब दानव
महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया था, तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु,
महेश तीनों ने अपने- अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक
देवी को उत्पन्न किया, महर्षि कात्यायन ने सर्व प्रथम इनकी पूजा की। इसी
कारण से यह देवी कात्यायनी कहलाई। आज वीरवार को छठे नवरात्रे पर उपासक
मां कात्यायनी की उपासना करेंगे। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी है, भगवान
कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं माता की
पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की थी। मां कात्यायनी बृजमंडल की
अधिष्ठात्री देवी भी हैं। मां का स्वरूप अत्यंत ही भव्य और दिव्य है।
इनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला और भास्वर है, मां की 4 भुजाएं हैं,
दाहिनी तरफ के उपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर
मुद्रा में है। बांयी ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में
कमल पुष्प सुशोभित है। मां का वाहन सिंह है। मां कात्यायनी की भक्ति और
उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों
फलों की प्राप्ति हो जाती है, उपासक के रोग, शोक, संताप, भय आदि भी नष्ट
हो जाते हैं। मां पापों को भी नष्ट करने वाली देवी है। इनकी उपासना से भी
सुगम और सरल मार्ग कोई दूसरा नहीं है इसलिए उपासकों को मां की शरण में
जाकर उनकी उपासना करनी चाहिए।

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