मुजफ्फरनगर। चरथावल क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं और किसानों की मांगों को लेकर शनिवार को ग्राम मंगनपुर में भारतीय किसान यूनियन की किसान पंचायत आयोजित की गई। भारी बारिश के बावजूद पंचायत में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। शाम करीब पौने पांच बजे शुरू हुई पंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों को जागरूक किया और सरकार से जमीन का उचित मुआवजा देने की मांग की।

राकेश टिकैत ने कहा कि गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की जमीन को औने-पौने दाम पर नहीं लिया जाने दिया जाएगा। उन्होंने मांग की कि एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन का सर्किल रेट बाजार भाव के आधार पर तय किया जाए और किसानों को बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाए।

उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी, लोहा, स्टील और मजदूरी सहित अन्य सामग्री का भुगतान मौजूदा बाजार दरों के हिसाब से किया जाता है, लेकिन किसानों की जमीन का मूल्य पुराने सर्किल रेट के आधार पर तय करना उचित नहीं है। टिकैत ने कहा कि वर्ष 2013 के रेट पर आज जमीन लेना किसानों के साथ नाइंसाफी है।
किसान पंचायत में राकेश टिकैत ने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों की समस्याएं भी सुनीं। किसानों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान जमीन, रास्ते और मुआवजे से जुड़ी समस्याओं को उनके सामने रखा। टिकैत ने किसानों को भरोसा दिलाया कि भूमि अधिग्रहण के मामले में उनका शोषण नहीं होने दिया जाएगा और भाकियू किसानों के हित में मजबूती से आवाज उठाएगी।
उन्होंने किसानों से किसी भी भूमि संबंधी निर्णय में जल्दबाजी नहीं करने और एकजुट रहने की अपील की। टिकैत ने कहा कि जिन गांवों की जमीन हाईवे परियोजना से प्रभावित हो रही है, वहां गांव-गांव पंचायतें आयोजित कर किसानों को भूमि अधिग्रहण से जुड़े अधिकारों और मुआवजे की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जाएगा।
किसान पंचायत के दौरान किसान नेताओं के घर पुलिस की जांच से जुड़े मुद्दे पर भी राकेश टिकैत से सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि इस मामले का पूरा ब्योरा गाजीपुर बॉर्डर पर दिया जाएगा।
भाकियू नेता और पंचायत के मुख्य आयोजक विकास शर्मा ने कहा कि किसानों की जमीन कौड़ियों के भाव बिकने नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में किसानों के हितों का ध्यान रखा जाना जरूरी है और उन्हें जमीन का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
पंचायत में भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष पंडित राजपाल शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव ठाकुर राजवीर सिंह जादौन, प्रदेश महासचिव ओमपाल मलिक, राष्ट्रीय सचिव जाहिर फारूकी, जिलाध्यक्ष नवीन राठी और मोनू प्रधान सहित कई किसान नेताओं ने किसानों को संबोधित किया।
किसानों ने स्थानीय समस्याएं भी उठाईं
किसान पंचायत में केवल भूमि अधिग्रहण ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की कई स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने हाईवे के बीच आने वाली जमीन के लिए रास्ते और अंडरपास बनाए जाने की मांग रखी। इसके अलावा नगला राई में हाईवे पर कट देने की मांग भी अधिकारियों के सामने रखी गई।
मंगनपुर से नगला पिथौरा तक संपर्क मार्ग को पक्का कराने, न्यामू में चकबंदी विभाग के नक्शा 23 को निरस्त करने तथा रौनी और मंगनपुर में सहकारी समितियों की स्थापना की मांग भी पंचायत में उठी। किसानों ने चौकड़ा बिजलीघर की क्षमता बढ़ाने की समस्या भी अधिकारियों के सामने रखी।
अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
शनिवार देर शाम तक ग्राम मंगनपुर में भाकियू नेता विकास शर्मा के संयोजन में किसान पंचायत चलती रही। पंचायत में क्षेत्र के दर्जनों गांवों से किसान पहुंचे। किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, बिजली विभाग के अधिकारी, चकबंदी विभाग के अधिकारी और उप जिलाधिकारी भी मौजूद रहे।
किसानों ने विभिन्न समस्याओं और मांगों से संबंधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। किसानों ने भूमि अधिग्रहण से लेकर सड़क, बिजली, चकबंदी और सहकारी समितियों से जुड़े मुद्दों के समाधान की मांग की।
प्रदेश और राष्ट्रीय पदाधिकारी रहे मौजूद
किसान पंचायत की अध्यक्षता भाकियू के प्रदेश कार्यकारी सदस्य ठाकुर बृजपाल सिंह ने की। संचालन रामकुमार सिंह और सुधीर पुंडीर ने किया। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव ठाकुर राजवीर सिंह जादौन, राष्ट्रीय सचिव जाहिर फारूकी, जिलाध्यक्ष नवीन राठी, प्रदेश अध्यक्ष पंडित राजपाल शर्मा, बघरा ब्लॉक अध्यक्ष कपिल, एनसीआर प्रभारी ठाकुर कपिल सोम और युवा जिलाध्यक्ष शामली प्रभात मलिक सहित बड़ी संख्या में भाकियू पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पंचायत में राजेंद्र सिंह, ओमपाल सिंह, कपिल चौधरी और प्रधान विनोद पुंडीर सहित अन्य किसान नेता भी उपस्थित रहे। भारी बारिश के बावजूद किसानों की मौजूदगी ने पंचायत को महत्वपूर्ण बना दिया। भाकियू ने भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने और किसानों को संगठित करने की रणनीति भी स्पष्ट की।

