गन्ने पर टॉप बोरर का कहर! फसल बचाने को राकेश टिकैत ने CM योगी से मांगी रात 6 से 12 बजे तक बिजली

गन्ने पर टॉप बोरर का कहर! फसल बचाने को राकेश टिकैत ने CM योगी से मांगी रात 6 से 12 बजे तक बिजली

मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की खड़ी फसल पर टॉप बोरर कीट का बढ़ता प्रकोप किसानों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है। गन्ने की फसल को इस खतरनाक कीट से बचाने के लिए अब किसानों ने अनोखा रास्ता अपनाने की तैयारी की है। किसानों का कहना है कि टॉप बोरर रात के समय सक्रिय होता है और रोशनी की ओर तेजी से आकर्षित होता है। ऐसे में खेतों में प्रकाश जाल लगाकर इस कीट को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए रात के समय बिजली की जरूरत होगी।

किसानों की इसी मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। उन्होंने मांग की है कि किसानों को शाम छह बजे से रात 12 बजे तक सिंगल फेज बिजली की आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसान खेतों में प्रकाश जाल लगाकर टॉप बोरर कीट को नियंत्रित कर सकें।

रात में सक्रिय होता है टॉप बोरर

गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाने वाला टॉप बोरर रात्रिचर कीट है। दिन के समय इसकी सक्रियता कम रहती है, जबकि रात होते ही यह खेतों में सक्रिय हो जाता है। यही वजह है कि इसके नियंत्रण के लिए रात के समय अपनाई जाने वाली तकनीक को प्रभावी माना जा रहा है।

चौधरी राकेश टिकैत ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मेरठ के जिला कृषि रक्षा अधिकारी की तकनीकी रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक टॉप बोरर कीट प्रकाश की ओर आकर्षित होता है। अंधेरे में खेतों में प्रकाश जाल या सौर प्रकाश जाल लगाए जाने पर कीट रोशनी की ओर आकर्षित होकर वहां पहुंच सकता है। इस तरह उसे एक स्थान पर एकत्र कर नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

प्रकाश जाल के लिए रात की बिजली जरूरी

किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या प्रकाश जाल को संचालित करने के लिए बिजली की है। इसी को देखते हुए रात में निर्धारित समय के लिए बिजली आपूर्ति की मांग की गई है। राकेश टिकैत ने पत्र में कहा है कि यदि शाम छह बजे से रात 12 बजे तक सिंगल फेज बिजली उपलब्ध कराई जाती है, तो किसान इस दौरान अपने खेतों में प्रकाश जाल का इस्तेमाल कर सकेंगे।

किसानों का कहना है कि टॉप बोरर के नियंत्रण के लिए दवाइयों के छिड़काव के साथ प्रकाश आधारित तकनीक का इस्तेमाल भी उपयोगी हो सकता है। रात के समय खेतों में रोशनी होने पर कीट उसके प्रति आकर्षित होंगे और प्रकाश जाल के जरिए उन्हें नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे गन्ने की खड़ी फसल को बड़े नुकसान से बचाने की उम्मीद है।

मेरठ मंडल की बैठक में उठी थी मांग

रात में बिजली आपूर्ति की यह मांग अचानक सामने नहीं आई है। टॉप बोरर के बढ़ते प्रकोप को लेकर एक सितंबर को मेरठ मंडल में बैठक हुई थी। बैठक में किसानों ने गन्ने की फसल को इस कीट से बचाने के उपायों पर चर्चा करते हुए शाम छह बजे से रात 12 बजे तक बिजली उपलब्ध कराने की मांग रखी थी।

किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मेरठ के जिलाधिकारी ने भी इस मामले में पहल की। जिलाधिकारी ने 16 सितंबर को पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराया था। पत्र में मेरठ के जिला कृषि रक्षा अधिकारी की तकनीकी रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रकाश जाल के इस्तेमाल की उपयोगिता बताई गई थी।

गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की चिंता

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में फसल पर टॉप बोरर का बढ़ता प्रकोप किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ा रहा है। किसानों के अनुसार इस कीट के प्रकोप से गन्ने की बढ़वार प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।

राकेश टिकैत ने भी मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में इस समस्या की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा है कि समय रहते कीट पर नियंत्रण नहीं किया गया तो गन्ने के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। किसानों के लिए यह केवल फसल बचाने का सवाल नहीं है, बल्कि उनकी आय और पूरे कृषि चक्र से जुड़ा विषय है।

सौर प्रकाश जाल भी विकल्प

टॉप बोरर के नियंत्रण के लिए किसानों के सामने सौर प्रकाश जाल का विकल्प भी रखा गया है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार प्रकाश और सौर प्रकाश आधारित जाल का इस्तेमाल कीट को आकर्षित कर नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। हालांकि जिन किसानों के पास ऐसी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, उनके लिए रात की बिजली आपूर्ति महत्वपूर्ण हो जाती है।

अब शासन के फैसले पर टिकी निगाहें

टॉप बोरर से गन्ने की फसल को बचाने के लिए किसान अब शासन और विद्युत विभाग की ओर देख रहे हैं। किसानों की मांग है कि कीट के रात्रिकालीन व्यवहार को देखते हुए शाम छह बजे से रात 12 बजे तक सिंगल फेज बिजली की व्यवस्था की जाए, ताकि खेतों में प्रकाश जाल चलाया जा सके। मेरठ से उठी यह मांग अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। किसानों को उम्मीद है कि शासन उनकी समस्या को देखते हुए जल्द कोई निर्णय लेगा।

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