मुजफ्फरनगर। पंचायत चुनाव की रंजिश में करीब 26 वर्ष पहले हुए खूनी संघर्ष और हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने शनिवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। पीठासीन अधिकारी ज्योत्सना सिवाच ने पूर्व प्रधान के पति समेत सात आरोपियों को हत्या और जानलेवा हमले के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सभी दोषियों पर एक लाख 87 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का अर्थदंड भी लगाया है। सातों दोषियों पर लगाए गए जुर्माने की कुल राशि 13 लाख 9 हजार रुपये है।

न्यायालय के आदेश के अनुसार जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि राज्य कोष में जमा की जाएगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि मृतक के उत्तराधिकारी परिजनों और घटना में घायल हुए लोगों को दी जाएगी। करीब 26 वर्ष पहले पंचायत चुनाव के दौरान शुरू हुई रंजिश में स्कूल से घर लौट रहे युवकों के साथ मारपीट के बाद उन्हें छुड़ाने पहुंचे परिजनों पर फायरिंग की गई थी। गोलीबारी में कई लोग घायल हुए थे, जबकि गंभीर रूप से घायल रविंद्र की मेरठ ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई थी।

पंचायत चुनाव की हार के बाद बढ़ी थी रंजिश
अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला भोपा थाना क्षेत्र के गांव धीराहेड़ी और महमूदपुर माजरा से जुड़ा है। धीराहेड़ी निवासी जसवीर के कुटुंब की हरवीरी ने पंचायत चुनाव लड़ा था। वहीं दूसरी ओर महमूदपुर माजरा निवासी बसंत की पत्नी भी चुनाव मैदान में थीं।
चुनाव परिणाम में हरवीरी को हार का सामना करना पड़ा था। अभियोजन के अनुसार चुनाव के दौरान दोनों पक्षों के बीच समर्थन और विरोध को लेकर तनातनी शुरू हुई थी। चुनाव खत्म होने के बाद भी दोनों पक्षों के बीच रंजिश बनी रही। धीरे धीरे विवाद इतना बढ़ गया कि 20 सितंबर 2000 को दोनों पक्ष आमने सामने आ गए और मामला खूनी संघर्ष में बदल गया।
स्कूल से घर लौट रहे युवकों को रास्ते में घेरा
20 सितंबर 2000 को जसवीर सिंह ने भोपा थाने में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तहरीर के मुताबिक उसका भतीजा जयविंद्र पुत्र धर्मवीर गांव के रूपक और गौतम के साथ जनता इंटर कॉलेज भोपा से छुट्टी के बाद घर लौट रहा था।
बताया गया कि तीनों युवक गांव धीराहेड़ी में धूम सिंह के मकान के सामने पहुंचे। आरोप है कि वहां पहले से मौजूद धूम सिंह, उसके बेटे गुलवीर, ओमवीर, अनिल और रविंद्र के अलावा नवाब, प्रीतम, संजीव, पंकज तथा महमूदपुर माजरा निवासी बसंत ने रूपक और गौतम को पकड़ लिया।
आरोपियों ने दोनों युवकों के साथ मारपीट की और उन्हें खींचकर धूम सिंह के मकान के अंदर ले गए। जयविंद्र किसी तरह वहां से निकलने में कामयाब रहा और उसने घर पहुंचकर परिजनों को घटना की जानकारी दी।
युवकों को छुड़ाने पहुंचे परिजनों पर हुई फायरिंग
दोनों युवकों के साथ मारपीट की सूचना मिलने के बाद उनके परिजन और अन्य लोग उन्हें छुड़ाने के लिए मौके पर पहुंचे। तहरीर के अनुसार धर्मवीर, सत्यपाल, संजीव, सुरेंद्र, लोटन सिंह, विनोद, रविंद्र और धर्मपाल समेत अन्य लोग वहां पहुंचे थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार परिजनों ने युवकों को छुड़ाने का प्रयास किया तो आरोपियों ने फायरिंग शुरू कर दी। आरोप है कि बंदूक, पिस्टल और तमंचों से गोलीबारी की गई। अचानक हुई फायरिंग से मौके पर भगदड़ मच गई।
गोलीबारी में सुरेंद्र, रविंद्र समेत कई लोग घायल हो गए। फायरिंग के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घायलों को तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया।
मेरठ ले जाते समय रविंद्र ने दम तोड़ा
जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल रविंद्र और सत्यपाल को बेहतर उपचार के लिए मेरठ रेफर किया गया। परिजन दोनों घायलों को लेकर मेरठ के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में रविंद्र की हालत बिगड़ गई।
मेरठ पहुंचने से पहले ही रविंद्र ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत के बाद मामले में हत्या की धाराएं जुड़ीं और पुलिस ने घटना की विवेचना शुरू कर दी। अन्य घायलों का भी उपचार कराया गया।
रविंद्र की मौत के बाद परिवार में मातम छा गया। पंचायत चुनाव की रंजिश में शुरू हुआ विवाद एक व्यक्ति की जान जाने तक पहुंच गया था।
पुलिस ने 10 आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया था आरोप पत्र
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल, घायलों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना आगे बढ़ाई। विवेचना पूरी होने के बाद 10 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी, जो गन्ना सोसायटी का पूर्व चेयरमैन बताया गया, की मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके खिलाफ न्यायिक कार्रवाई समाप्त हो गई, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रही।
12 गवाहों की गवाही और साक्ष्यों पर हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की पीठासीन अधिकारी ज्योत्सना सिवाच के न्यायालय में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से घटना को साबित करने के लिए 12 गवाह अदालत के समक्ष पेश किए गए।
डीजीसी राजीव शर्मा, एडीजीसी अरुण कुमार और अधिवक्ता अनोद बालियान ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। अभियोजन ने अदालत के समक्ष चुनावी रंजिश, युवकों के साथ मारपीट, उन्हें छुड़ाने पहुंचे परिजनों पर फायरिंग और रविंद्र की मौत से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किए।
लंबी सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और मामले से जुड़े साक्ष्यों पर दोनों पक्षों की ओर से बहस हुई। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
पूर्व प्रधान के पति समेत सात दोषी करार
शनिवार को अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए पूर्व प्रधान के पति बसंत समेत अनिल, रविंद्र, नवाब, संजीव, पंकज और प्रीतम को दोषी करार दिया।
अदालत ने सभी सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक लाख 87 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इस तरह सातों दोषियों पर कुल 13 लाख 9 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
करीब 26 वर्ष से चल रहे इस मुकदमे में अदालत के फैसले के बाद मामले की सुनवाई का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ।
जुर्माने की आधी राशि राज्य कोष में, बाकी पीड़ितों को
न्यायालय ने अर्थदंड की राशि के वितरण को लेकर भी आदेश दिया है। कुल जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि राज्य कोष में जमा होगी। शेष 50 प्रतिशत राशि मृतक के उत्तराधिकारी परिजनों और घटना में घायल हुए लोगों को दी जाएगी।
न्यायालय के आदेश के मुताबिक जुर्माने की 25 प्रतिशत राशि हत्या में जान गंवाने वाले रविंद्र के उत्तराधिकारी परिजनों को और 25 प्रतिशत राशि घटना में घायल हुए लोगों को दी जाएगी।
26 साल बाद अदालत के फैसले से मुकदमे का अहम पड़ाव पूरा
वर्ष 2000 में पंचायत चुनाव के दौरान शुरू हुई रंजिश के बाद हुए इस खूनी संघर्ष के मामले में करीब 26 वर्ष तक न्यायिक प्रक्रिया चली। इस दौरान एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहा।
शनिवार को अदालत ने पूर्व प्रधान के पति समेत सात आरोपियों को हत्या और जानलेवा हमले के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत के फैसले से वर्ष 2000 में हुई इस घटना से जुड़े मुकदमे में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव आया है।

