आर्य समाज मंदिर निरपुडा के 76 वे वार्षिक उत्सव के अवसर पर चार दिवसीय सामवेद पारायण यज्ञ के तीसरे दिन की प्रथम सभा में सामवेद के मंत्रों के द्वारा यज्ञ सम्पन्न किया गया। यज्ञ के पुरोहित कुंवरपाल शास्त्री जी व सुनील शास्त्री जी गुरुकुल बरनावा रहे। यजमान संजीव राणा रहे । इस अवसर पर प्रोफेसर बलजीत सिंह आर्य जी ने समाज सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती जी के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वामी जी ने धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को पुन: हिन्दू बनने की प्रेरणा देकर शुद्धि आंदोलन चलाया। दयानंद सरस्वती द्वारा चलाए गए ‘शुद्धि आन्दोलन’ के अंतर्गत उन लोगों को पुनः हिन्दू धर्म में आने का मौका मिला जिन्होंने किसी कारणवश इस्लाम या ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। आज भी यदि कोई ईसाई या मुस्लिम पुन: अपने पूर्वजों के धर्म में आना चाहता है तो उसके लिए आर्य समाज के दरवाजे खुले हैं जहां किसी भी प्रकार का जातिवाद, बहुदेववाद, मूर्तिपूजा आदि नहीं है। शायद इसीलिए एनी बेसेंट ने कहा था कि स्वामी दयानन्द ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने कहा कि ‘भारत भारतीयों के लिए हैं। आर्य समाज के मंत्री हरपाल सिंह आर्य जी ने बाहर से आए हुए अतिथि गणों का स्वागत करते हुए बताया कि जो व्यक्ति सुख चाहता है उसे यज्ञ आदि कार्यक्रमों में अवश्य जाना चाहिए। इस अवसर पर भूपत आर्य,देवपाल राणा, जसवीर सिंह राणा,कंवरपाल शास्त्री , ब्रजपाल आर्य,अंकुर राणा, प्रियव्रत राणा, ,आदि उपस्थित रहे
