आगरा। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद की तहसील ऊंचाहार में तैनात उप जिलाधिकारी विवेक राजपूत के खिलाफ शासन स्तर पर चल रही जांच में उनके पास 70 लाख रूपये से अधिक आय का संतोषजनक स्पष्टीकरण शासन को न मिलने के बाद आय से अधिक संपत्ति मामले में आगरा विजिलेंस विभाग में विवेक राजपूत के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया गया है।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, आगरा मंडल के जनपद फिरोजाबाद में तैनाती के दौरान जमीनी मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप के बाद 10 जुलाई 2024 को योगी सरकार ने विवेक राजपूत को सस्पेंड किया था, हालाँकि बाद में नियुक्ति विभाग ने 20 नवम्बर 2025 को बहाल करते हुए विवेक राजपूत को रायबरेली का नया एसडीएम बनाया था। विवेक राजपूत 2020 बैच के पीसीएस हैं। वह एटा और फिरोजाबाद के एसडीएम रह चुके है।

70 लाख से अधिक आय का कोई संतोष जवाब नहीं
विजिलेंस विभाग आगरा सेक्टर में तैनात निरीक्षक रवि शंकर पांडे बताया कि आय के वैध स्रोतों से प्राप्त आय और वास्तविक आय में 70 लाख से अधिक अंतर होने के बाद इस संबंध में कोई संतोषजनक उत्तर एसडीम की तरफ से न मिलने पर जांच के बाद इस प्रकरण में उनके खिलाफ का अभियोग पंजीकृत कराया गया है।
इस संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक उनकी वैध आय 38.87 लाख रुपये थी, जबकि संपत्ति और रखरखाव पर 1.09 करोड़ रुपये खर्च हुए। करीब 70.92 लाख रुपये का अंतर मिला, जिसका संतोषजनक जवाब एसडीएम विवेक राजपूत नहीं दे पाए
जमीनी भ्रष्टाचार के मामले में 2024 में निलंबित हुए थे एसडीएम
वर्ष 2024 में जनपद फिरोजाबाद में तैनाती के दौरान एसडीएम विवेक राजपूत जमीनी भ्रष्टाचार के मामले के आरोप में निलंबित किया गया था। जुलाई 2024 में जनपद फिरोजाबाद में शिकोहाबाद तहसील अंतर्गत रुधैनी गांव में करीब 75 बीघा जमीन से जुड़े मामले में शिकायत के बाद प्रारंभिक जांच हुई थी। इसमें जमीन के दस्तावेजों और नामांतरण प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इसके बाद तत्कालीन एसडीएम विवेक राजपूत, तहसीलदार का प्रभार संभाल रहे नायब तहसीलदार, कानूनगो समेत कई कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। शासन ने बाद में मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी।
विजिलेंस ने जांच के दौरान विवेक राजपूत की आय, संपत्तियों के अर्जन और उनके रखरखाव से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल की गयी ।
ज्ञात हुआ है जांच अवधि में उनकी कुल वैध आय करीब 38.87 लाख रुपये रही, जबकि संपत्तियों के अर्जन और रखरखाव पर 1.09 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय पाया गया। एजेंसी ने दोनों के बीच करीब 70.92 लाख रुपये के अननुपातिक अंतर का दावा किया है।
जांच एजेंसी ने आय और व्यय के अंतर को लेकर एसडीएम से स्पष्टीकरण मांगा था। विजिलेंस के अनुसार जवाब संतोषजनक नहीं मिला। इसके बाद शासन के निर्देश पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। विजिलेंस सेक्टर आगरा के निरीक्षक रविशंकर पांडेय की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया।

