UP में पुलिस डिपार्टमेंट में बड़े बदलाव के संकेत

UP में पुलिस डिपार्टमेंट में बड़े बदलाव के संकेत

लखनऊ। यूपी की कानून व्यवस्था पर लगातार विपक्ष के हमले और अंदर खाने की राजनीति के बीच पुलिस विभाग में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक डीजी से लेकर एडिशनल एसपी तक के तबादला की लिस्ट तैयार हो गई है। चर्चा यहां तक है कि एक दिल्ली के डीजी ने यूपी की कमान संभालने की तैयारी शुरू कर दी है। जिसके पीछे विभागीय राजनीति बताई जा रही है। वहीं अन्य तबादले के पीछे पुलिस विभाग में स्थायी अधिकारी की तैनाती न होना वजह है। जबकि कई जिलों में प्रमोशन होने के बाद भी अधिकारी उसी पोस्ट पर तैनाती।

योगी दो सरकार के गठन के बाद पुलिस विभाग कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन ईद होते ही बदलाव के शासन की तरफ से संकेत आ गए हैं। जिसमें कमिश्नर से लेकर एडिशनल एसपी तक है। पुलिस मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक वाराणसी के कमिश्नर ए सतीश गणेश ने लेटर लिखकर हटाने की मांग की है। वहीं कई सालों से एक ही जिले में टिके कमिश्नर व कप्तान की लिस्ट गृह विभाग ने बना ली है।

आईपीएस व पीपीएस संवर्ग के तीन दर्जन से ज्यादा अधिकारियों के तबादले प्रमोशन होने के चलते किए जाएंगे। जिसमें आगरा, बुलंदशहर, सीतापुर, सुलतानपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, वाराणसी ग्रामीण व देवरिया समेत 13 जिले के कप्तान हैं। जहां एसएसपी प्रमोट होकर डीआईजी रैंक के अधिकारी हो गए हैं। वहीं पांच जगह चुनाव और क्राइम ग्राफ वजह बनी है। क्राइम को लेकर प्रयागराज, झांसी व गोरखपुर को लेकर अधिकारी विशेष तौर पर नजर रखे हुए हैं।

पुलिस के कई विभागों में अधिकारियों की स्थाई नियुक्ति न होने से काम पर असर पड़ रहा है। एक ही अधिकारी को दो-दो विभागों की जिम्मेदारी है। जिसमें आर्थिक अपराध अनुसंधान का काम राज कुमार विश्वकर्मा बतौर डीजी देख रहे हैं। उनके पास पहले से उप्र. पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के चेयरमैन की जिम्मेदारी है। डीजी अभिसूचना देवेंद्र सिंह के पास डीजी विजिलेंस की जिम्मेदारी है। यहां का पद डीजी पीवी रमाशास्त्री के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद से खाली है। इसी तरह एंटी करप्शन के एडीजी हरिराम शर्मा के पास पुलिस आवास का जिम्मा है। तो पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के चेयरमैन आरके विश्वकर्मा के पास आर्थिक अपराध अनुसंधान का चार्च है। इसी तरह यूपी 112, एडीजी कार्मिक व मानवाधिकार जैसे विभाग में भी स्थायी तैनाती नहीं है। इस लिए जल्द ही इनमें तैनाती की उम्मीद की जा रही है।

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