लखनऊ/जयपुर। गुर्जर समाज ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अब स्पष्ट और मुखर रुख अपनाया है। अखिल भारतीय गुर्जर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि शंकर धाभाई ने देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को आठ सूत्रीय मांग पत्र भेजकर समाज को केवल चुनावी वोट बैंक के तौर पर देखने की मानसिकता बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज अब अपने योग्य, शिक्षित और सक्षम लोगों के लिए सम्मानजनक राजनीतिक प्रतिनिधित्व चाहता है।


रवि शंकर धाभाई ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में गुर्जर समाज की सामाजिक और राजनीतिक मौजूदगी महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद समाज की संख्या और प्रभाव के अनुपात में विधानसभा, लोकसभा, स्थानीय निकायों, राजनीतिक संगठनों, बोर्ड, निगम, आयोग तथा अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक भागीदारी के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से समाज के शिक्षित और प्रतिभाशाली युवाओं में राजनीतिक उपेक्षा की भावना बढ़ रही है।


उन्होंने कहा कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में गुर्जर समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है, लेकिन राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में उसकी भागीदारी को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।
धाभाई ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी समाज को केवल चुनाव के समय मतदाता या वोट बैंक के रूप में देखना उचित नहीं है। राजनीतिक दलों को समाज की सामाजिक भागीदारी के साथ उसकी राजनीतिक आकांक्षाओं को भी गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने मांग की कि गुर्जर समाज के योग्य और सक्षम लोगों को राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भी सम्मानजनक स्थान दिया जाए।
आठ सूत्रीय मांग पत्र में राजनीतिक दलों से समाज को दिए गए राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विभिन्न नियुक्तियों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध नीति तैयार करने पर जोर दिया गया है।
रवि शंकर धाभाई ने कहा कि राजनीतिक दलों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अलग-अलग राज्यों में गुर्जर समाज को अब तक कितना राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया गया है और भविष्य में समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या योजना है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी व्यवस्था से समाज में विश्वास बढ़ेगा और राजनीतिक दलों के साथ संवाद का रास्ता भी मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज के युवाओं में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में राजनीतिक क्षेत्र में भी उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिलना जरूरी है। समाज के शिक्षित और प्रतिभावान लोगों को केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें संगठन और शासन की निर्णय प्रक्रिया में जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
धाभाई ने राजनीतिक दलों को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि समाज की राजनीतिक उपेक्षा अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज अपने अधिकारों और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को मजबूती से उठाता रहेगा। राजनीतिक दलों को समाज की अपेक्षाओं पर गंभीरता से विचार करते हुए प्रतिनिधित्व के संबंध में ठोस और पारदर्शी कदम उठाने चाहिए।
अखिल भारतीय गुर्जर महासंघ की ओर से भेजे गए मांग पत्र को समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर आगे की रणनीति के महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विभिन्न राजनीतिक दल इस मांग पत्र पर क्या रुख अपनाते हैं और गुर्जर समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर किस तरह के कदम उठाए जाते हैं।

