शामली। प्रदेश सरकार द्वारा न्याय शुल्क मूल्य में वृद्धि के विरोध में जिला बार एसोसियेशन के अधिवक्ता मंगलवार को न्यायिक कार्यों से विरत रहे तथा मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर इस वृद्धि को तत्काल वापस लिए जाने की मांग की। जानकारी के अनुसार मंगलवार को जिला बार एसोसियेशन के अधिवक्ताओं ने प्रदेश सरकार द्वारा न्यायशुल्क के मूल्यों में वृद्धि किए जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रदर्शन कर न्यायिक कार्योे का बहिष्कार किया। एसोसियेशन के अध्यक्ष राकेश कुमार एडवोकेट ने बताया कि सरकार द्वारा न्याय शुल्क पर दस गुना वृद्धि की गयी जिस कारण आम जनता को सस्ता व सुलभ न्याय दिलए जाने के सिद्धांत को सरकार ने एक तरीके से समाप्त कर दिया है जिससे वादकारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड रहा है और वे मुकदमा लडने से वंचित हो रहे हैं। न्याय शुल्क की इस मूल्य वृद्धि के विरोध में 1 अक्तूबर 2021 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों व तहसील बार एसोसियेशन के अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहे थे जिसके पश्चात अब भी पुनः न्याय शुल्क मूल्य में वृद्धि करते हुए सभी जनपदों में लागू कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि उक्त परिस्थितियों को देखते हुए उक्त न्याय शुल्क वृद्धि के विरोध में केन्द्रीय संघर्ष समिति हाई कोर्ट बैंच स्थापना, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक बैठक 19 अप्रैल को मेरठ कचहरी परिसर स्थित पं. नानकचंद सभागार में आयोजित की गयी जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विभिन्न बार एसोसियेशन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभा में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के अनुपालन में मंगलवार को सभी अधिवक्ताओं ने अपने-अपने न्यायालय में न्यायिक कार्यों से विरत रहकर विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को भेजे एक ज्ञापन में कहा गया कि यह न्याय शुल्क पर दस से 100 गुना तक टिकट वृद्धि करने के कारण वादकारियों पर अत्याधिक भार पड रहा है। जिस कारण आम जनता को भी सस्ता व सुलभ न्याय दिए जाने का सिद्धांत समाप्त हो गया है इसलिए इस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। इस मौके पर धीरेन्द्र कुमार, मणिकांत शर्मा, ओमपाल सिंह, सत्यनारायण सिंह, रामकुमार वर्मा, विपिन कुमार, विवेक कुमार आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
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