मुजफ्फरनगर(संजय धीमान)। सनातन धर्म महाविद्यालय में दो अक्टूबर के उपलक्ष्य में महात्मा गांधी जी एवं लालबहादुर शास्त्री जी की जयन्ती पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘‘जीवन को हाँ, ड्रग्स को ना’’ रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला आबकारी निरीक्षक श्री प्रभात तिवारी (क्षेत्र-3, जानसठ) रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया। मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय प्राचार्य प्रो0 सुधीर कुमार पुण्डीर द्वारा महात्मा गांधी एवं लालबहादुर शास्त्री जी की प्रतिमा माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में इतिहास विभाग के प्रोफेसर डा0 अशोक त्रिपाठी रहे जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री के संघर्षों एवं योगदानों पर विशेष प्रकाश डाला। प्रोफेसर त्रिपाठी ने शास्त्री जी के प्रारंभिक जीवन के संघर्षों से लेकर 1962 के भारत-पाक युद्ध का उल्लेख करते हुए उनके द्वारा लिये गये सेना के प्रति कदम एवं अमेरिका द्वारा गेहूँ न दिये जाने को लेकर शास्त्रीजी द्वारा एक दिन उपवास रखने आह्वान का जिक्र करते हुए शास्त्री जी के उदार और कठोर होने की स्थितियों का जिक्र किया। जन्तुविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा0 शेखर चन्द ने गांधीवाद को लेकर श्रोताओं के समक्ष अपना मत प्रस्तुत किया। सत्य, अहिंसा जैसे मानवीय मूल्यों के प्रति गांधीजी का दृष्टिकोण और आज के सन्दर्भ में इन मूल्यों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
हिन्दी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा0 प्रमोद कुमार मिश्र ने गांधी जी की लाठी की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए गिरधर कविराय की एक कुण्डलियां प्रस्तुत की। गांधी जी के दिये गए सिद्धान्त के ऊपर डा0 प्रमोद मिश्र ने अपनी स्व-रचित कविता प्रस्तुत की, जिसका श्रोताओं एवं छात्र-छात्राओं तथा एन0सी0सी0 कैडेटों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। इस ओजपूर्ण कविता से सभी रोमांचित हो उठे।
एम0ए0 हिन्दी के छात्र कपिल एवं अक्षय कुमार ने बाबा नागार्जुन की कविता ‘‘तीनों बन्दर बापू के’’ की बहुत ही सुन्दर एवं शानदार प्रस्तुति दी। एन0सी0सी0 कैडेट मानसी एवं काजल पुण्डीर ने ‘दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल’ गीत सुन्दर तरन्नुम के साथ प्रस्तुत किया।
आबकारी निरीक्षक ने नशे के प्रति युवकों में बढ़ती ललक को देश के लिए खतरा बताते हुए इससे दूरी बरतने संदेश दिया, साथ ही उन्होंने नशामुक्ति के संदर्भ में गांधीजी के विचारों का उल्लेख करते हुए एक स्वस्थ समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।
महाविद्यालय प्राचार्य ने नई शिक्षा नीति के सन्दर्भ में गांधीजी के विचारों को रेखांकित किया। प्राचार्य जी ने लालबहादुर शास्त्री का संबंध मुजफ्फरनगर से जोड़ते हुए यह बताया कि शास्त्रीजी ने यहां गुरुकुल में शिक्षण भी किये थे। प्राचार्य जी ने शास्त्री जी के प्रभावशाली व्यक्तित्व को सभी के लिए अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी बताया। ‘जीवन को हां, ड्रग्स को ना’ विषय पर बोलते हुए प्रोफेसर (ले0) एस0एन0 सिंह ने खेलों में बढ़ते डोपिंग एवं ड्रग्स के प्रचलन के नकारात्मक प्रभाव को रेखांकित किया। डा0 सिंह ने मुख्य अतिथि एवं प्राचार्य के साथ-साथ सभी आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस कार्यक्रम की संयोजिका डा0 सविता एवं सह-संयोजक श्री पवन कुमार रहे। कार्यक्रम संयोजिका डा0 सविता द्वारा उत्तर प्रदेश शासन द्वारा भेजे गए नशा मुक्ति के लिए भेजे गए शपथ (‘हम शपथ लेते हैं कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम में सहयोग करेंगे। सभी ने अपने हाथ उठाकर इस शपथ को ग्रहण किया।कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के सभी वर्ग के कर्मचारियों ने अपना-अपना योगदान दिया। जयन्ती के अवसर पर प्रो0 अलका बंसल, डा0 ममता श्याम, डा0 शुचि मित्तल, डा0 राजेश कुमार, डा0 बसन्त कुमार, प्रो0 अजयपाल सिंह, प्रो0 विश्वम्भर पाण्डेय, प्रो0 अरुणिमा, डा0 अनिल कुमार, डा0 रिम्पल पुण्डीर, डा0 दिव्या बक्सी, डा0 पीयूष कुमार, डा0 अरुण रत्न, सुश्री प्रतिभा चौधरी, सुश्री शुभी चौरसिया, सुश्री शिवानी मार्या, श्री पवन कुमार तिवारी, डा0 सुबोध कुमार, श्री अजय, डा0 मो0 सलीम आदि मौजूद रहे।
