कॉपी-किताबों के नाम पर स्कूलों का नया खेल, जानिए कैसे भारी हो रहा बच्चों का बस्ता

भोपाल. मासूम बच्चे अब भी पांच से छह किलो तक के स्कूल बैग अपने कंधों पर लादने को मजबूर हैं लेकिन अधिकारियों को बस्तों के बोझ उठाए ये बच्चे नजर नहीं आ रहे। स्कूल बैग नीति लागू हुए 18 दिन हो चुके हैं लेकिन इसका पालन शुरू नहीं हुआ है। पत्रिका ने कुछ स्कूलों की पड़ताल की तो पता चला अब भी बच्चे भारी बस्ते ढो रहे हैं। इस बीच स्कूलों की चालाकी भी सामने आई है. पेरेंट और बच्चे बताते हैं कि जब बैग चेकिंग के लिए अधिकारी स्कूल आते हैं तो टीचर आधी कापी-किताबें लॉकर में रखवा देतीं हैं. उनके जाने के बाद फिर निकाल लेती हैं.

स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल बैग पॉलिसी.2020 जारी की है। अधिकारियों का दावा था कि नई स्कूल बैग नीति अधिसूचित होते ही लागू की जाएगी। अभिभावकों का कहना है कि पॉलिसी लागू होने के बाद यह उम्मीद थी कि बस्तों के बोझ से कुछ मुक्ति मिलेगी। स्कूलों ने दिन के हिसाब से चार्ट भी बनाया। इसके बाद भी बच्चे सारी किताबें ले जाते हैं। बच्चों से पूछा तो उन्होंने बताया कि टीचर वही कॉपी और किताबें मांगती हैं जो घर छोड़कर आते हैं। कॉपी नहीं देने पर डांट पड़ती है।

सख्ती हो तो मिले राहत
– कक्षा दूसरी तक के विद्यार्थियों को होमवर्क नहीं दिया जाएगा।
– आदेश में कहा गया है कि शाला प्रबंधन समिति के द्वारा ऐसी समय सारणी तैयार की जाए जिससे विद्यार्थियों को प्रतिदिन सभी पुस्तकें अभ्यास पुस्तिकाएं, कापियां नहीं लानी पड़े।
– कम्प्यूटर, नैतिक शिक्षा एवं सामान्य ज्ञान के लिए कक्षाएं बिना पुस्तकों के लगाई जाए।
– प्रत्येक स्कूल को नोटिस बोर्ड और कक्षा में बस्ते के वजन का चार्ट प्रदर्शित करना होगा।
– स्कूल बैग हल्के वजन के हो जो कि दोनों कंधों पर आसानी से फीट हो सके। विद्यार्थियों को शाला में ट्रॉली बैग लाने की अनुमति नहीं होगी।

टीम आते ही टीचर लॉकर में रखवा देती हैं किताबें
बच्चों के माता-पिता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी बेटी एक निजी स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। वैसे ही वह बहुत दुबली है। उसके बस्ते का वजन चार किलो के करीब है। भारी बैग के कारण उसके कंधों में दर्द रहने लगा है। बस्ते का वजन कम करने का नियम तो बना है लेकिन पालन कहां हो रहा है। बेटी ने बताया कि बैग की चेकिंग के लिए जब भी कोई अधिकारी स्कूल में आता है तो टीचर आधी किताबें लॉकर में रखवा देतीं हैं और अधिकारी के जाने के बाद फिर किताबें बैग में रख दीं जाती हैं।

इधर भोपाल के डीइओ नितिन सक्सेना का कहना है कि स्कूलों के निरीक्षण के लिए स्कूल केंद्र स्तर पर प्राचार्यों की टीम बनाई जा रही है जो कि प्राइवेट स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी। बस्ते का वजन यदि मापदंड से अधिक मिलता है तो स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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