बागपत। आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के चौथे दिन अजितनाथ सभागार पांडुक्षिला मैदान के वातानुकूलित हॉल बडौत में मुनि सुव्रत नाथ विधान का आयोजन किया गया।

सुबह श्रधालुओ ने गर्म प्रासुक जल से शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र विकास जैन व वरदान जैन को प्राप्त हुआ। संगीतकार द्वारा गाए भजन अमृत से गगरी भरो कि आज प्रभु न्हवन करेंगे को विशेष रूप से सराहा गया। नित्य नियम पूजन मे नवदेवता पूजन, भगवान पार्श्वनाथ पूजन, सोलह कारण पूजन, नंदीश्वर दीप की पूजन की गयी. सौधर्म इंद्र विकास जैन द्वारा मंडल पर 48 अर्घ समर्पित किये गए। मध्य प्रदेश से पधारे विद्वान पंडित राजकिन्ग ने विधान की महिमा के संबंध मे सभी को बताया। विधान के मध्य मंगल प्रवचन देते हुए मुनि विशुभ्र सागर जी महाराज ने आज के धर्म उत्तम शौच धर्म के विषय मे बताया। उन्होंने कहा कि शुचिता का होना ही शौच धर्म है। लोभ कषाय के कारण मानव का मन सदा अशुचि बना रहता है। संतोष की भावना जब हृदय मे प्रकट होती है, तब मन मे शुचिता का भाव जागृत होता है। इस धर्म के पालन से छोटे बड़े का भेद मिट जाता है.सभा मे सुभाष जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, राकेश जैन, बाल्किशन जैन, विकास जैन, हंस कुमार जैन,अनिल जैन, अशोक जैन, आशीष जैन, संजय जैन, अंकुर जैन आदि उपस्थित थे। शाम 6 बजे से मंदिर मे माउंट लिटेरा जी स्कूल के बच्चो के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमो की प्रस्तुति की गयी। पुरस्कार वितरण जैन तीर्थ यात्रा समिति द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती हिमांशी द्वारा किया गया।नाटिका वृद्ध आश्रम क्यों है, और नियम का फल को विशेष रूप से सराहा गया। महावीर सा मुझे बनना है कार्यक्रम को भी काफी पसंद किया गया। कार्यक्रम मे विद्यालय के डायरेक्टर बिजेंद्र जैन, अध्यापिका डॉक्टर नीलू जैन, सेजल तोमर, ऋषभ जैन, श्रीमती स्वाति, पूजा , कुलदीप, जोनी आदि उपस्थित थे।
