मुजफ्फरनगर। नशीली दवाओं की बरामदगी के मामले में नगर कोतवाली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अंबा विहार निवासी शाजेब सिद्दीकी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। एडीजे-3 न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने शाजेब की 15 लाख 40 हजार रुपये की नकदी रिलीज कराने संबंधी अर्जी खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों का कथित रूप से उचित पालन नहीं किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने तत्कालीन एसएसपी और वर्तमान डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह, तत्कालीन एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति समेत संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को आदेश की प्रति भेजने के निर्देश दिए हैं।

अदालत की इस कार्रवाई से नशीली दवाओं की बरामदगी से जुड़े पुराने मामले में पुलिस की विवेचना और जब्त संपत्ति से संबंधित कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है। न्यायालय ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। मामले में नकदी की जब्ती के बाद कथित अवैध संपत्ति की पहचान, जब्ती और समपहरण से संबंधित प्रावधानों पर उचित कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

दो फरवरी 2024 को नशीली दवाओं के साथ हुई थी गिरफ्तारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर कोतवाली पुलिस ने दो फरवरी 2024 को शाजेब सिद्दीकी और उसके साथियों को नशीली दवाओं की बरामदगी के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपितों के कब्जे से कारों, नशीले कैप्सूल और इंजेक्शनों के साथ कुल 23 लाख 69 हजार 800 रुपये की नकदी बरामद किए जाने की बात सामने आई थी।
इस मामले में बरामद नकदी को लेकर बाद में न्यायालय में अलग-अलग अर्जियां दाखिल की गईं। मामले के सहआरोपित अनुज की 5 लाख 50 हजार रुपये की नकदी पहले ही रिलीज की जा चुकी है। वहीं, शाजेब सिद्दीकी ने अपनी बताई गई 15 लाख 40 हजार रुपये की रकम वापस प्राप्त करने के लिए अदालत का रुख किया था।
जानकारी के मुताबिक, शाजेब इस मामले के सिलसिले में पहले उच्च न्यायालय भी गया था। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उसने विचारण न्यायालय में दोबारा अर्जी दाखिल की। हालांकि, सुनवाई के बाद एडीजे-3 की अदालत ने उसकी अर्जी खारिज कर दी।
एनडीपीएस एक्ट के अध्याय-5ए के पालन पर अदालत की आपत्ति
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के अध्याय-5ए के प्रावधानों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय के आदेश के अनुसार, नशीले पदार्थों और नकदी की बरामदगी के बावजूद कथित रूप से अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान, जब्ती और समपहरण से संबंधित निर्धारित प्रक्रिया को उचित तरीके से आगे नहीं बढ़ाया गया।
अदालत ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होने से जब्त नकदी को लेकर आरोपितों को राहत मिलने की स्थिति पैदा हो सकती थी। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों के कार्यों और मामले में अपनाई गई प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए।
एनडीपीएस एक्ट के तहत नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों की जांच के साथ-साथ अपराध से कथित रूप से अर्जित संपत्ति के संबंध में भी कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन महत्वपूर्ण होता है। अदालत की टिप्पणी इसी कानूनी प्रक्रिया के अनुपालन से संबंधित बताई गई है।
तत्कालीन एसएसपी और एसपी सिटी समेत अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख
अदालत ने अपने आदेश में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और वर्तमान डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह, तत्कालीन एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी नगर व्योम बिंदल, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी महावीर सिंह चौहान, मामले के विवेचक संजय गिरी और जब्ती करने वाले उपनिरीक्षक विनोद कुमार के कार्यों तथा भूमिका का उल्लेख किया है।
न्यायालय ने मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आदेश की प्रति संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों और विभागों को भेजने के निर्देश दिए हैं। इनमें अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, अपर मुख्य सचिव गृह और केंद्र सरकार का संबंधित विभाग शामिल हैं।
अदालत के निर्देशों का उद्देश्य मामले में सामने आए प्रक्रियागत सवालों पर संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना है। हालांकि, आदेश में अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किए जाने और उनके खिलाफ किसी अंतिम दंडात्मक निष्कर्ष के बीच अंतर है। आगे की कार्रवाई संबंधित सक्षम प्राधिकारी और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।
नकदी रिलीज की अर्जी खारिज होने से मामले ने पकड़ा तूल
शाजेब सिद्दीकी की नकदी रिलीज कराने संबंधी अर्जी खारिज होने के बाद इस मामले में बरामद संपत्ति और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े कानूनी पहलू प्रमुख हो गए हैं। एक ओर अदालत ने नकदी वापस देने की मांग स्वीकार नहीं की, वहीं दूसरी ओर एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के अनुपालन को लेकर संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर ध्यान आकर्षित किया।
इस मामले में पहले सहआरोपित की नकदी रिलीज होने और शाजेब की अर्जी खारिज होने के बीच कानूनी परिस्थितियों का अंतर भी महत्वपूर्ण है। केवल अलग-अलग आरोपितों की नकदी रिलीज होने या नहीं होने के आधार पर मामले के सभी कानूनी पहलुओं का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद संबंधित उच्च अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए हैं। अब इस मामले में आगे की विभागीय या अन्य विधिक कार्रवाई पर नजर रहेगी।

