मुजफ्फरनगर। खतौली थाना क्षेत्र में वर्ष 2011 में युवती से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। एडीजे/एफटीसी कोर्ट नंबर-2 की न्यायाधीश शिवकुमारी ने मामले में फैसला सुनाया।

पुलिस के अनुसार, 19 अगस्त 2011 को पीड़िता के चाचा ने थाना खतौली में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनकी भतीजी के साथ मैनपाल पुत्र चन्द्रपाल, मोनू उर्फ मानदेव पुत्र लीलू नाई निवासी ग्राम जावन, जोगेन्द्र पुत्र धर्मपाल निवासी मखदूमपुर और अंकित पुत्र धनपाल निवासी ग्राम अन्ती, थाना खतौली ने दुष्कर्म किया।

तहरीर के आधार पर थाना खतौली पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 606/2011 दर्ज किया था। मामले में धारा 363, 366 और 376(2)जी भादवि के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया और साक्ष्य संकलित करते हुए विवेचना पूरी की। इसके बाद सात नवंबर 2011 को चारों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन और मिशन शक्ति अभियान के तहत मामले में प्रभावी पैरवी की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन और पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में क्षेत्राधिकारी खतौली सुभाष चन्द्रा तथा थाना प्रभारी खतौली दिनेश चन्द के नेतृत्व में पैरवी की गई।
पुलिस के अनुसार, मामले से जुड़े सभी गवाहों को समय से न्यायालय के समक्ष पेश कराया गया। अभियोजन की ओर से भी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। एडीजीसी कमल कुमार और कोर्ट पैरोकार आरक्षी लोकेश कुमार ने भी मामले में प्रभावी पैरवी की।
सुनवाई के बाद अदालत ने मैनपाल, मोनू उर्फ मानदेव, जोगेन्द्र और अंकित को धारा 366 एवं 376(2)जी भादवि के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने चारों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
मुजफ्फरनगर पुलिस ने बताया कि लंबे समय से लंबित गंभीर अपराध के इस मामले में प्रभावी विवेचना, साक्ष्य संकलन और अभियोजन की पैरवी के चलते दोषियों को सजा दिलाई गई। पुलिस के अनुसार ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए न्यायालय में प्रभावी पैरवी जारी है।

