मुजफ्फरनगर। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट-1 ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 60-60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। फैसला सात अक्टूबर 2026 को पॉक्सो कोर्ट-1 की न्यायाधीश मंजुला भालोटिया ने सुनाया।

पुलिस के अनुसार, 11 दिसंबर 2020 को पीड़िता के पिता ने थाना बुढ़ाना में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि अकरम पुत्र जब्बार और आसिफ उर्फ देशी पुत्र फरमान, निवासी ग्राम जौला, थाना बुढ़ाना, उनकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 526/2020 दर्ज किया था। मामले में धारा 363 और 376डी भादवि तथा धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।

पुलिस ने दोनों आरोपियों अकरम और आसिफ उर्फ देशी को 12 दिसंबर 2020 को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करते हुए साक्ष्य संकलित किए और 22 दिसंबर 2020 को आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन और मिशन शक्ति अभियान के तहत मामले में प्रभावी पैरवी की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक और पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में क्षेत्राधिकारी बुढ़ाना गजेन्द्रपाल सिंह तथा थाना प्रभारी बुढ़ाना सुभाष अत्री के नेतृत्व में न्यायालय में पैरवी की गई।
पुलिस ने बताया कि मामले से जुड़े गवाहों को समय से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराया गया और अभियोजन की ओर से आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य रखे गए। एडीजीसी विक्रान्त राठी और विनय अरोरा तथा कोर्ट पैरोकार आरक्षी प्रमोद कुमार ने भी मामले में प्रभावी पैरवी की।
सुनवाई पूरी होने के बाद सात अक्टूबर को पॉक्सो कोर्ट-1 की न्यायाधीश मंजुला भालोटिया ने अकरम और आसिफ उर्फ देशी को धारा 363/376डी भादवि तथा धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास और 60-60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
मुजफ्फरनगर पुलिस ने बताया कि गंभीर अपराध के इस मामले में त्वरित कार्रवाई, साक्ष्य संकलन, विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप दोनों आरोपियों को न्यायालय से सजा दिलाई गई। पुलिस के अनुसार ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए न्यायालय में प्रभावी पैरवी जारी है।

