अगरतला/बागपत। त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) और 1994 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग धनखड़ का सोमवार को अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया। उनका शव कार्यालय कक्ष में मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर पुलिस घटना की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। हालांकि, मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

घटना की सूचना मिलते ही त्रिपुरा पुलिस में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के उनके पैतृक गांव बिहारीपुर और मुजफ्फरनगर स्थित उनके ससुराल पक्ष में भी मातम का माहौल है। परिजनों ने आत्महत्या की अटकलों पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

बैंक की नौकरी से IPS तक का सफर
अनुराग धनखड़ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के निवासी थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बड़ौत के जनता वैदिक इंटर कॉलेज में हुई। वर्ष 1988 में उन्होंने बड़ौत स्थित सिंडिकेट बैंक (वर्तमान में कैनरा बैंक) में फील्ड ऑफिसर के रूप में नौकरी शुरू की। बैंक सेवा के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और वर्ष 1994 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित हुए।
मुजफ्फरनगर से था पारिवारिक संबंध
अनुराग धनखड़ का मुजफ्फरनगर से भी गहरा पारिवारिक संबंध था। उनका विवाह जनपद के मीरापुर क्षेत्र के ग्राम दलपत में हुआ था। उनके निधन की खबर से बागपत के साथ-साथ मुजफ्फरनगर में उनके रिश्तेदारों और परिचितों में भी शोक की लहर है।
परिजनों के अनुसार, अनुराग धनखड़ करीब 10 दिन पहले अपनी पत्नी कल्पना के साथ बड़ौत स्थित अपने घर आए थे। उन्होंने परिवार के साथ समय बिताया और पूरी तरह सामान्य दिखाई दे रहे थे। परिजनों का कहना है कि उनके व्यवहार से किसी प्रकार के मानसिक तनाव का संकेत नहीं मिला था।
निधन की सूचना मिलने के बाद उनकी वृद्ध माता रगबीरी देवी की तबीयत बिगड़ गई। परिवार के सदस्य त्रिपुरा के लिए रवाना हो चुके हैं।
CBI में निभाई अहम जिम्मेदारियां
अपने लंबे पुलिस करियर में अनुराग धनखड़ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में पुलिस अधीक्षक (SP), डीआईजी, संयुक्त निदेशक और अतिरिक्त निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले, नीरव मोदी प्रकरण और 1984 के सिख विरोधी दंगों सहित कई चर्चित मामलों की जांच से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। इसके अलावा वे संयुक्त राष्ट्र (UN) के कोसोवो शांति मिशन में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे।
वर्ष 2025 में उन्हें त्रिपुरा का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था। उनके निधन से पुलिस सेवा ने एक अनुभवी अधिकारी को खो दिया है।

