मोरना (मुजफ्फरनगर)। गंगा नदी में कथित रूप से केमिकल युक्त काला और दुर्गंधयुक्त पानी प्रवाहित किए जाने के मामले में वन विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मोरना रेंज के वन विभाग ने उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद स्थित राम बहादुर नारायण सिंह शुगर मिल्स, लक्सर को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।

मोरना रेंज में तैनात वन दरोगा प्रवेश कुमार छिल्लर के अनुसार, संबंधित औद्योगिक इकाइयों द्वारा हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से होकर बहने वाली गंगा नदी में कथित रूप से अत्यधिक दुर्गंधयुक्त और गहरे काले रंग का प्रदूषित पानी छोड़ा गया। विभाग का दावा है कि इससे बड़ी संख्या में मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मौत हुई है, जबकि नदी किनारे की प्राकृतिक वनस्पतियों और पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचा है।

वन विभाग के अनुसार, पूर्व वर्षों की तरह इस बार भी मानसून की पहली बारिश और बाढ़ के दौरान उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्रों में जमा प्रदूषित अपशिष्ट और रसायनयुक्त पानी को बाणगंगा, सोनाली नदी तथा अन्य सहायक नदियों के माध्यम से गंगा में छोड़े जाने की आशंका है। विभाग का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह जलीय जीवन, पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है, जिसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
गौरतलब है कि शुकतीर्थ (शुकताल) क्षेत्र में गंगा के पानी के काला और दुर्गंधयुक्त होने की शिकायतों को लेकर पिछले कुछ दिनों से स्थानीय लोगों, साधु-संतों और भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) में भारी नाराजगी है। जलीय जीवों की मौत, तटवर्ती फसलों को नुकसान और श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था प्रभावित होने के आरोपों को लेकर पूर्व में धरना-प्रदर्शन भी किए जा चुके हैं।
हालांकि, इस मामले में नामजद शुगर मिल या अन्य संबंधित औद्योगिक इकाइयों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।

