मुजफ्फरनगर। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रही सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर मुजफ्फरनगर से समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद हरेंद्र मलिक ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी जनआंदोलन का समाधान बातचीत और संवाद के जरिए होना चाहिए, न कि दमनात्मक कार्रवाई के माध्यम से। सांसद ने कहा कि सरकार को सोनम वांगचुक द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

हरेंद्र मलिक ने कहा कि सोनम वांगचुक केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने उन्हें एक शिक्षित, देशभक्त और समाज के प्रति समर्पित व्यक्ति बताते हुए कहा कि वह देश के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि मुजफ्फरनगर जैसे शहरों में भी आज सोनम वांगचुक के आंदोलन की चर्चा हो रही है तो यह इस बात का प्रमाण है कि उनकी बात देश के आम लोगों तक पहुंच रही है।

सांसद ने केंद्र सरकार को सलाह देते हुए कहा कि यदि सरकार की टीम में कोई मंत्री अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहा है तो उसमें बदलाव करने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर यदि लगातार सवाल उठ रहे हैं तो सरकार अपनी पार्टी या हाल ही में अन्य दलों से भाजपा में शामिल हुए योग्य और सक्षम लोगों में से किसी को शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंप सकती है।
सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई की आलोचना करते हुए हरेंद्र मलिक ने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक परंपराओं और मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि देश ने आपातकाल का दौर भी देखा है और इतिहास इस बात का साक्षी है कि जनता हमेशा लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में खड़ी रही है।
उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में हुए जनआंदोलनों ने समय-समय पर राजनीति और शासन व्यवस्था को प्रभावित किया है। इसलिए किसी भी आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखने के बजाय उसके पीछे मौजूद जनभावनाओं और मुद्दों को समझना अधिक आवश्यक है।
हरेंद्र मलिक ने कहा कि सोनम वांगचुक अपनी किसी व्यक्तिगत मांग या निजी लाभ के लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार, उनका आंदोलन देश के बच्चों, शिक्षा व्यवस्था और भविष्य से जुड़े व्यापक मुद्दों पर केंद्रित है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह टकराव का रास्ता छोड़कर संवाद की पहल करे और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक एवं संवेदनशील निर्णय लेकर आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकाले।

