मुजफ्फरनगर में मौत बन गए बिजली के खंभे! 24 घंटे में 4 बेजुबान पशुओं की मौत, ग्रामीण बोले- विभाग की लापरवाही कब रुकेगी?

मुजफ्फरनगर में मौत बन गए बिजली के खंभे! 24 घंटे में 4 बेजुबान पशुओं की मौत, ग्रामीण बोले- विभाग की लापरवाही कब रुकेगी?

मुजफ्फरनगर। मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गाँव नावला में बिजली विभाग की कथित लापरवाही लगातार बेजुबान पशुओं की जान ले रही है। गाँव की सड़कों और गलियों में खड़े कई बिजली के खंभे इन दिनों ग्रामीणों और पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। शुक्रवार को एक बार फिर बड़ा हादसा उस समय हो गया, जब एक बिजली के खंभे में उतरे हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आने से दो बछड़ों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। बछड़ों को तड़प-तड़पकर दम तोड़ते देख ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर आक्रोश जताते हुए लापरवाही के आरोप लगाए।

घटना के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। लोगों का कहना था कि यह हादसा किसी प्राकृतिक कारण से नहीं, बल्कि बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। उनका आरोप है कि लंबे समय से गाँव के कई बिजली के खंभों में करंट उतरने और जर्जर विद्युत व्यवस्था की शिकायतें विभागीय अधिकारियों से की जा रही हैं, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे ठीक एक दिन पहले गुरुवार को भी इसी गाँव में करंट की चपेट में आने से दो घोड़ियों की दर्दनाक मौत हो गई थी। लगातार चौबीस घंटे के भीतर चार बेजुबान पशुओं की मौत ने पूरे गाँव में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। लोगों का आरोप है कि पहली घटना के बाद यदि बिजली विभाग ने तत्काल मौके पर पहुंचकर खंभे और विद्युत लाइन की तकनीकी जांच कर आवश्यक मरम्मत कर दी होती, तो शुक्रवार का यह हादसा टाला जा सकता था।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते गाँव की विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो भविष्य में किसी राहगीर, किसान, महिला या मासूम बच्चे की जान भी जा सकती है। उनका कहना है कि गाँव की गलियों और रास्तों से प्रतिदिन सैकड़ों लोग और पशु गुजरते हैं, ऐसे में करंट वाले खंभे किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग से पूरे गाँव में विशेष अभियान चलाकर सभी बिजली के खंभों, जर्जर तारों और विद्युत उपकरणों का तकनीकी सर्वे कराने की मांग की है। साथ ही जिन खंभों में करंट उतरने की समस्या है, उन्हें तत्काल बदलने और सभी फॉल्ट दूर करने की भी मांग उठाई गई है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि लगातार हो रही घटनाओं के लिए जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यह हादसे हुए हैं, उनके खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

लगातार दो दिनों में चार बेजुबान पशुओं की मौत ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और विभागीय अधिकारियों पर टिकी हैं कि आखिर कब तक जानलेवा खंभों से लोगों और पशुओं को राहत मिल पाएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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