सीएम योगी की पहल से खुशी गुप्ता के परिवार को मिली नई उम्मीद: डीएम ने सौंपा ई-रिक्शा, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा कदम

सीएम योगी की पहल से खुशी गुप्ता के परिवार को मिली नई उम्मीद: डीएम ने सौंपा ई-रिक्शा, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा कदम

कानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कानपुर जिले की दिव्यांग खुशी गुप्ता के पुनर्वास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उसके परिवार को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की गई है। शुक्रवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नया ई-रिक्शा सौंपा। यह सहायता परिवार की आजीविका को स्थायी आधार देने के उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार काे बताया कि एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत ई-रिक्शा निःशुल्क उपलब्ध कराया। वाहन का पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर कराया गया है, ताकि परिवार को नियमित आय का साधन मिल सके।

कल्लू गुप्ता लंबे समय से किराये का ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उनकी आय का बड़ा हिस्सा वाहन के किराये में खर्च हो जाता था। हाल ही में सड़क दुर्घटना में पैर में चोट लगने के कारण उनकी कमाई भी प्रभावित हो गई थी, जिससे परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने स्वयं ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की पहल की।

खुशी गुप्ता पिछले वर्ष अपनी समस्याओं को लेकर कानपुर से पैदल लखनऊ पहुंची थी, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उससे मुलाकात कर उसके उपचार, शिक्षा और पुनर्वास के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने विभिन्न विभागों के समन्वय से उसके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में फरवरी 2026 में खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया। नियमित स्पीच थेरेपी के बाद अब वह पहले की तुलना में बेहतर सुन और समझ पा रही है तथा बोलना भी शुरू कर चुकी है। उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने लखनऊ के मोहान रोड स्थित समेकित विशेष माध्यमिक (आवासीय) विद्यालय में कक्षा नौ में प्रवेश दिलाया है।

ई-रिक्शा मिलने के बाद खुशी ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “थैंक यू योगी जी।” उसकी मां गीता गुप्ता ने कहा कि पहले बेटी के इलाज और पढ़ाई की चिंता थी, अब परिवार की आजीविका की चिंता भी समाप्त हो गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का धन्यवाद दिया। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि खुशी के पुनर्वास में किसी प्रकार की कमी न रहे, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है।

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