मुजफ्फरनगर। जनपद की बहुचर्चित कांशीराम शहरी आवास योजना मुजफ्फरनगर को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों को जिला प्रशासन ने पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और मनगढ़ंत करार दिया है।

नगर मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौड़ ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक कार्य पूरी तरह नियमों और पारदर्शिता के आधार पर किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक और निहित स्वार्थी तत्व जानबूझकर जनता के बीच भ्रम फैलाने और प्रशासन की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मामला तब चर्चा में आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर कुछ लोगों ने डूडा विभाग के एक कर्मचारी पर पैसे लेकर अवैध आवंटन के आरोप लगाए थे। हालांकि प्रशासन की प्रारंभिक जांच में इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, कांशीराम कॉलोनी में आवास आवंटन को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। कुछ मामलों में पात्रता की जांच और कब्जे को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रशासन का कहना है कि कई बार गलत जानकारी और अफवाहों के आधार पर भी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाए जाते हैं, जिससे स्थिति भ्रमित होती है।
इसी बीच प्रशासनिक सूत्रों का यह भी कहना है कि कॉलोनी में कुछ अवैध कब्जों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवास उपयोग की शिकायतें मिली हैं, जिनकी अलग से जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर प्रशासन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम जांच में जुटी हुई है।
अधिकारियों ने साफ किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, जिन लाभार्थियों को नियमों के तहत आवास आवंटित हुए हैं, उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भरोसा जताते हुए संतोष व्यक्त किया है।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

