नई दिल्ली। कांग्रेस ने अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते का स्वागत किया है। कांग्रेस ने कहा है कि भले ही इस समझौते की पूरी जानकारी अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सबको उम्मीद है कि दोनों देशों के साथ इजराइल भी इस अंतरिम समझौते का पालन करेंगे।

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने सोमवार को एक्स पोस्ट में कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बिना किसी प्रतिबंध के फिर से खुलने से भारत को निश्चित रूप से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद संरचनात्मक समस्याएं जल्द ही दूर हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि ये चिंताएं पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध से पहले की हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा के सिर्फ दो दिन बाद शुरू हुआ था।

उन्होंने कहा कि रुपया एक वर्ष से अधिक समय से काफी दबाव में है और डॉलर की मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। जीडीपी वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण निर्धारक यानी निजी निवेश की दरें कई वर्षों से सुस्त रही हैं। उन्होंने इस सुस्ती के पीछे तीन मुख्य कारण गिनाए; पहला- पिछले एक दशक में वास्तविक मजदूरी में ठहराव आना। दूसरा- मुख्य कारण चीन से आयात की डंपिंग पर रोक लगाने में सरकार की विफलता के कारण रिकॉर्ड व्यापार घाटा हुआ है और रोजगार पैदा करने वाले एमएसएमई की वृद्धि खतरे में पड़ी है। तीसरा- कर अधिकारियों और जांच एजेंसियों को दी गई अनियंत्रित शक्तियों के कारण कुल मिलाकर निवेश का माहौल खराब होना है।
वैश्विक नीति और भू-राजनीतिक मोर्चे पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, जिसे नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के बाद भारत ने सफलतापूर्वक अलग-थलग कर दिया था, अब उसने नया क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव हासिल कर लिया है। पाकिस्तान के रणनीतिक ढांचे में चीन की गहरी पैठ के कारण यह स्थिति भारत की विदेश नीति के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बन गई है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिका व ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद दोनों देश शुक्रवार को स्विटजरलैंड में इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।विदेशी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की घोषणा की। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी भी खत्म करने का ऐलान किया। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि समझौते के अंतिम मसौदे पर दोनों पक्षों की सहमति हो गई है। अब लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो जाएगा।

