बुजुर्ग ने पाई-पाई जोड़कर प्लॉट खरीदा। लोन लेकर बेटे-बहू की सुविधा के लिए मकान बनाया। लेकिन, बहू ने प्रताड़ित कर उस मकान से ही निकाल दिया। एसपी, कलेक्टर ने भी कुछ नहीं किया। 15 साल से वे अपनी 65 वर्षीय पत्नी के साथ दर-दर की ठोकरें खाते रहे। उनका एक पैर खराब हो गया। पत्नी को हृदयरोग हो गया। विवश होकर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली, तो वहां उनका दर्द समझा गया। हाईकोर्ट ने बहू को आदेश दिया है कि 60 दिन के भीतर मकान खाली कर ससुर को कब्जा दे।
कलावती ने बताया कि उनकी बहू आए दिन उन्हें खरीखोटी सुनाती थी। गालियां देती और मारपीट करती थी। खाना-पानी भी देना बंद कर दिया। जगदीश ने बताया कि बहू ने प्रताड़ना के बाद घर से निकलने को कहा। उनके सामान भी फेंक दिए। मजबूरी में उन्हें 2006 में घर छोड़ना पड़ा। इसकी शिकायत उन्होंने माढ़ोताल थाना, एसपी व कलेक्टर से भी की, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। एक आश्रम में कुछ दिन बिताने के बाद वहां से भी निकाल दिए गए। वे भिक्षाटन कर जीवनयापन कर रहे हैं।

जगदीश ने बताया कि अधिवक्ता रवि व्यास की मदद से हाईकोर्ट में बहू के खिलाफ केस दायर किया। हाईकोर्ट की जस्टिस नंदिता दुबे की बेंच ने कहा कि अपनी कमाई से बनाए मकान में रहने व उससे लाभ लेने का व्यक्ति को पूरा अधिकार है। सीनियर सिटीजन के मामले में वैकल्पिक न्याय उपलब्ध होने के सिद्धांत का कड़ाई से पालन नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने आदेश दिए कि 60 दिन के अंदर बहू दीप्ति अपने बच्चों सहित बुजुर्ग दम्पती का मकान खाली कर उन्हें कब्जा सौंपे।

भूकम्प कॉलोनी धनवंतरि नगर में किराए के एक कमरे में 64 वर्षीय पत्नी कलावती गौतम के साथ रहने वाले 67 वर्षीय जगदीश गौतम बताते हैं कि वे सब्जी का धंधा करते थे। उनकी दो संतानें हैं। दोनों का विवाह कर दिया। बेटी ससुराल में है। 2003 में बेटे विजय व बहू दीप्ति की जिद पर उन्होंने जीवन भर की जमापूंजी लगाकर करमेता में 1720 वर्गफीट का प्लॉट खरीदा। नौ लाख रुपए लोन लेकर मकान बनाया। मकान बनते ही बहू दीप्ति ने सास-ससुर को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।