बताया गया कि उत्तराखंड के रुड़की और मंगलौर के बीच हरियाणा के कांवड़ियों के हमले में कार्तिक की जान गई है। कार्तिक दो दिन पहले ही कांवड़ लाने के लिए छुट्टी लेकर आया था। उसकी तैनाती गुजरात के जामनगर में थी। वह हंसते हुए घर से गंगाजल लाने के लिए रवाना हुआ था लेकिन किसी को क्या पता की बेटा अब कभी भी लौटकर नहीं आएगा।

बताया गया कि कार्तिक परिवार का सहारा था। लेकिन अब वह दुनिया में नहीं रहा। कार्तिक का छोटा भाई मुकुल है। जब से कार्तिक की नौकरी लगी, तभी से पिता योगेंद्र सिंह और छोटा भाई मुकुल ही कार्तिक के कंप्यूटर सेंटर को चला रहे हैं। नौकरी लगने से पहले कार्तिक ही कंप्यूटर सेंटर का संचालन करता था।
कांवड़ियों के बीच हुए झगड़े में घायल सिसौली के कांवड़िए भी देर शाम तक अपने-अपने घर पहुंच गए। वहीं गांव में गम का माहौल बना हुआ है। इस मामले में रुड़की के सिविल लाइन थाने में वारदात का मुकदमा दर्ज हुआ है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
कार्तिक के चाचा राजेंद्र सिंह ने रुड़की सिविल लाइन थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि सुबह करीब साढ़े छह बजे हरियाणा के दो कैंटरों में सवार हमलावरों ने कार्तिक पर हमला कर दिया था। उन्होंने बताया कि कार्तिक के सिर में गंभीर चोट आने और खून अधिक बह जाने के कारण भतीजे की मौत हो गई। हमलावर नीली ड्रेस पहने हुए थे।
