2024 के चुनाव के लिए वेस्‍ट यूपी पर टिकी सीएम योगी की नजरें, इन जिलों ओर सीटों के लिए बना बडा प्लॉन

2024 के चुनाव के लिए वेस्‍ट यूपी पर टिकी सीएम योगी की नजरें, इन जिलों ओर सीटों के लिए बना बडा प्लॉन

लखनऊ। अब तक पूर्वांचल की धुरी पर घूमती रही प्रदेश की राजनीति इस बार पश्चिमी छोर पर खड़ी होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने जहां पश्चिम उप्र के दो दर्जन से ज्यादा जिलों की कमान अपने हाथ में ली है, वहीं भाजपा ने बिजनौर निवासी धर्मपाल को प्रदेश संगठन महामंत्री बनाकर बड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री योगी ने पश्चिम उप्र का प्रभार संभालते ही सहारनपुर-शामली और मुजफ्फरनगर का दौरा कर साफ कर दिया कि इधर अब बड़ी राजनीतिक पटकथा लिखने की तैयारी है जिसमें संघ की भी भूमिका अहम होगी।

2022 के विधानसभा चुनाव की हवा मुजफ्फरनगर, कैराना, शामली और मेरठ से उठी। योगी ने कैराना पलायन के पीड़ितों के घर पहुंचकर न केवल चुनावी माहौल बदला, बल्कि सहारनपुर में शाकंभरी देवी विश्वविद्यालय, देवबंद में एटीएस सेंटर, कांधला में पीएसी कैंप और कांवड़ियों पर हेलीकाप्टर से पुष्पवर्षा की घोषणा कर लोगों से भावनात्मक संबंध भी मजबूत किया। गर्मी में शिमला बनाने समेत कई बयानों से चुनावी हवा बदलती गई।

2019 में हारी सीटों पर खास होमवर्क
अब, 2019 के लोकसभा चुनाव में हारी सीटों सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, संभल, मुरादाबाद, अमरोहा एवं रामपुर पर खास होमवर्क किया जा रहा है। उपचुनावों में भाजपा ने रामपुर की लैब में जीत का रसायन तैयार कर लिया। अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में सीएम योगी मुरादाबाद और सहारनपुर मंडलों में दस से ज्यादा दौरा कर चुके हैं। इसके संकेत साफ हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 80 में से 80 सीट जीतने की मंशा के साथ ही पश्चिम उप्र पर फोकस बनाए करेगी।

संगठन के नक्शे में पश्चिम उप्र ऊपर
चार चुनावों में सफल पारी खेलकर राष्टीय टीम में पहुंचे सुनील बंसल की जगह बिजनौर निवासी धर्मपाल ले चुके हैं। वो मेरठ, आगरा एवं लखनऊ में लंबे समय तक रहने की वजह से प्रदेश के सभी क्षेत्रों से परिचित हैं। भले ही संघ की पृष्ठभूमि से निकलकर भाजपा के लिए काम करने वालों को जातीय खांचे में नहीं देखा जाता, लेकिन उनका अन्य पिछड़ा वर्ग से आने के बड़े राजनीतिक मायने हैं। इस वर्ग की पश्चिम उप्र में बड़ी संख्या है। प्रदेश संगठन में पश्चिम उप्र से अश्विनी त्यागी महामंत्री, जबकि राज्यसभा सदस्य कांता कर्दम, सुरेंद्र नागर, नोएडा विधायक पंकज सिंह और देवेंद्र चौधरी उपाध्यक्ष की अहम भूमिका में हैं। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में भी पश्चिम उप्र के कई नाम चर्चा में हैं।

किसानों को साधने की कसरत
प्रदेश की राजनीति किसानों के इर्द-गिर्द घूमने लगी है। भाजपा ने इस नब्ज को पकड़ते हुए मेरठ के हस्तिनापुर में पांच से सात अगस्त तक किसान प्रशिक्षण संवर्ग आयोजित किया। इसमें प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने प्रदेश की सभी 80 सीटों को जीतने का संकल्प दिलाया। पश्चिम उप्र किसान आंदोलन का केंद्र रहा है, जिसकी डोर पकड़कर कांग्रेस, सपा, बसपा एवं रालोद पिछले विस के चुनावी मैदान में कूदे, लेकिन भगवा दुर्ग टस से मस नहीं हुआ। किसानों को साधने पर भाजपा नए सिरे से फोकस कर रही है वहीं लखीमपुरी खीरी में किसानों के साथ 75 घंटे के धरने पर बैठे राकेश टिकैत पर पार्टी की नजर बनी हुई है।

संघ की भी बड़ी भूमिका
सन 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत की नींव रखने वाले पश्चिम उप्र का राजनीतिक कद बढ़ता गया है। सन 2022 के विधानसभा चुनाव का राजनीतिक केंद्र मुजफ्फरनगर को बनाया गया व ध्रुवीकरण के सभी पत्ते पश्चिम उत्तर प्रदेश की आबोहवा में बिछाए गए। प्रदेश सह-संगठन महामंत्री पद पर रहते हुए कर्मवीर को जहां आधे राज्य का जिम्मा मिला, वहीं मेरठ के माधवकुंज एवं शंकर आश्रम से पश्चिम उत्तर प्रदेश, ब्रज क्षेत्र के अलावा उत्तराखंड की भी राजनीतिक दिशा तय की गई।

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