16 साल बाद मिला इंसाफ! सरसों की फसल काटने पर किसान को मारी थी गोली, बहनों पर तलवार से किया था हमला; पिता-पुत्र समेत 4 को उम्रकैद

16 साल बाद मिला इंसाफ! सरसों की फसल काटने पर किसान को मारी थी गोली, बहनों पर तलवार से किया था हमला; पिता-पुत्र समेत 4 को उम्रकैद

मुजफ्फरनगर। जनपद में करीब 16 साल पहले कृषि भूमि में खड़ी सरसों की फसल काटने को लेकर हुए खूनी संघर्ष के मामले में आखिरकार न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है। खेत में फसल काटने पहुंचे किसान और उसके परिवार पर जानलेवा हमला करने के मामले में विशेष एससी-एसटी न्यायालय ने पिता-पुत्र समेत चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर एक लाख पांच हजार 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में दोषी ठहराए गए चारों आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को वर्ष 2010 में हुए हमले के मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष कुमार त्यागी ने बताया कि यह मामला जमीन के स्वामित्व और खेत में खड़ी सरसों की फसल को लेकर शुरू हुए विवाद से जुड़ा है। गांव हुसैनपुर निवासी विजयपाल ने 28 मार्च 2010 को रामराज थाने में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, विजयपाल के भाई विक्रम ने गांव हंसावाला में कृषि भूमि बटाई पर लेकर उसमें सरसों की फसल बो रखी थी। इसी जमीन में से करीब आठ एकड़ भूमि रामावतार ने पंजाब निवासी मंजीत कौर को बेच दी थी। जमीन की बिक्री और स्वामित्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था। इसके साथ ही खेत में खड़ी सरसों की फसल को लेकर भी तनाव बना हुआ था।

थाना दिवस में शिकायत के बाद भी नहीं थमा विवाद

अभियोजन पक्ष के अनुसार, जमीन और फसल को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने पर रामावतार ने 27 मार्च 2010 को थाना दिवस में शिकायत की थी। शिकायत के बाद रामराज थाने के तत्कालीन उपनिरीक्षक कमल सिंह और लेखपाल अनिल सिंह मौके पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने विवादित जमीन और वहां खड़ी फसल का निरीक्षण किया था। दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया था। मौके पर हुई बातचीत के बाद यह सहमति बनी थी कि रामावतार विक्रम को खेत में खड़ी सरसों की फसल काटने से नहीं रोकेगा। इस सहमति के बाद विक्रम को उम्मीद थी कि वह बिना किसी परेशानी के अपनी फसल की कटाई कर सकेगा, लेकिन विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था।

मशीन लेकर खेत पर पहुंचते ही शुरू हुआ हमला

अभियोजन के मुताबिक, 28 मार्च 2010 की सुबह करीब आठ बजे विक्रम अपने गांव के मजदूरों और अपनी बहनों सविता, बृजेश, सुमित्रा तथा कविता के साथ सरसों की फसल काटने के लिए मशीन लेकर खेत पर पहुंचा था। आरोप है कि खेत पर पहले से ही रामावतार, उसका पुत्र प्रदीप, सूरजमल, कंवरपाल और जनेश्वर समेत अन्य लोग मौजूद थे। जैसे ही विक्रम और उसके परिवार ने फसल की कटाई शुरू करने का प्रयास किया, दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया और आरोपियों ने विक्रम तथा उसके साथ मौजूद परिवार के लोगों पर हमला कर दिया।

किसान के पेट में मारी गोली, बहनों पर तलवार से किया हमला

हमले के दौरान विक्रम ने विरोध किया तो आरोपियों ने उसे गोली मार दी। गोली उसके पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर खेत में गिर पड़ा। इसके बाद हमलावरों ने उसकी बहनों को भी निशाना बनाया। आरोपियों ने महिलाओं पर तलवार और लाठी-डंडों से वार कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था। घटना के दौरान ट्रैक्टर चढ़ाकर घायलों को कुचलने का प्रयास करने का आरोप भी लगाया गया था। खेत में अचानक हुए इस हमले से वहां अफरा-तफरी मच गई थी। घायल किसान और उसकी बहनों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद परिवार में दहशत का माहौल बन गया था।

पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया था आरोप-पत्र

घटना के बाद विजयपाल की तहरीर पर रामराज पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और एससी-एसटी एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाए और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए थे। विवेचना पूरी करने के बाद 15 मई 2010 को पांच आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया गया था। इसके बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा। करीब डेढ़ दशक से अधिक समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए गए।

आठ गवाहों की गवाही और मेडिकल रिपोर्ट बनी अहम आधार

मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय एससी-एसटी के न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष कुमार त्यागी ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में आठ गवाहों की गवाही कराई। इसके अलावा घटना में घायल हुए लोगों की चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य संबंधित साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयानों और चिकित्सा संबंधी दस्तावेजों के आधार पर घटना का पूरा घटनाक्रम न्यायालय के सामने रखा। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।

पिता-पुत्र समेत चार दोषियों को आजीवन कारावास

विशेष न्यायालय ने मामले में रामावतार, उसके पुत्र प्रदीप कुमार, कंवरपाल और जनेश्वर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही न्यायालय ने चारों दोषियों पर अलग-अलग एक लाख पांच हजार 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस तरह चारों दोषियों पर कुल चार लाख 22 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। मामले में नामजद पांचवें आरोपी सूरजमल की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। इस प्रकार वर्ष 2010 में खेत में सरसों की फसल काटने को लेकर शुरू हुआ विवाद करीब 16 साल बाद न्यायालय के फैसले के साथ एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *