शामली। सच का आइना दिखाना आज पत्रकारों के लिए दिन पर दिन कठिन होता जा रहा है निष्पक्ष और निर्भीक होकर पत्रकार पत्रकारिता कर सके इसके लिए जरूरी है कि देश में अब मीडिया आयोग का गठन हो।
जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (रजि.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग सक्सेना ने कहा कि हाल ही मे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले मे जिला प्रशासन द्वारा माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षा में पेपर लीक होने की घटना पर पत्रकारों को ही दोषी साबित कर जेल भेज देना लोकतंत्र की हत्या है।इस प्रकरण में बलिया से अमर उजाला के पत्रकार अजित कुमार ओझा ,दिग्विजय सिंह व राष्ट्रीय सहारा के मनोज गुप्ता को जेल भेज दिया गया।भ्रष्टाचार व्यवस्था को अगर कोई समाज का प्रहरी उजागर करने की हिम्मत जुटा पाता है तो जिलाप्रशासन उसे प्रोत्साहित करने के बजाय उसे ही जेल में डाल दे यह सर्वथा निन्दनीय कृत्य है।
इसी तरह झारखंड के बोकारो में एक स्कूल में अध्यापको द्वारा पत्रकारों की पिटाई मात्र इसलिए कर दी गई कि वह स्कूल में शिक्षा का क्या स्तर है यह दिखा रहे थे।यहां तक कि इस मामले में महिला पत्रकार को भी नहीं बख्शा गया। भौकाल टीवी के अयाज,समर व महिला पत्रकार शालिनी सिंह के साथ अध्यापको और रसोइयों द्वारा मारपीट की गई जिसका वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जो निन्दनीय है।
अनुराग सक्सेना ने कहा कि शासन – प्रशासन को सदैव सजग करना पत्रकारों का नैतिक कर्तव्य और जिम्मेदारी है। देश का लोकतंत्र चार स्तंभो पर खड़ा है पत्रकारिता को चौथा स्तंभ इसलिए माना गया है कि यदि तीन स्तंभ अपना रास्ता भटके तो यह चौथा स्तंभ उन्हे रास्ता दिखा सके।
पत्रकारों की एक गोष्ठी के दौरान श्री सक्सेना ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब देश में मीडिया आयोग का गठन होना बहुत आवश्यक है।मीडिया आयोग के गठन के बाद ही पत्रकार अपने आपको सुरक्षित महसूस करेंगे।

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