मुजफ्फरनगर। जनपद के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने शामली जनपद के थानाभवन थाना क्षेत्र के ग्राम मारुखेड़ी निवासी किसान गौतम सिंह की हत्या के बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने के चलते चार आरोपियों हसरत, इस्माईल, इरफान उर्फ हीरो और खलील निवासी ग्राम बुंटा, थाना गढ़ीपुख्ता को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान सामने आई परिस्थितियों, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों की स्थिति को देखते हुए अदालत ने आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं माना।

खेत में सिंचाई करने गए किसान की अगली सुबह मिली थी लाश
मामले के अनुसार, 21 जनवरी 2014 को थानाभवन थाने में किसान गौतम सिंह की हत्या के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया था। ग्राम मारुखेड़ी निवासी गौतम सिंह रात के समय अपने खेत में फसलों की सिंचाई करने के लिए गए थे। अगले दिन सुबह उनका शव खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा मिला। घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू की। विवेचना के दौरान कुछ लोगों के नाम सामने आए और पुलिस ने आरोपियों को नामजद करते हुए कार्रवाई की थी।

चश्मदीद गवाह नहीं होने से कमजोर हुआ अभियोजन पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि हत्याकांड का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था। अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। ऐसे मामलों में आरोप साबित करने के लिए परिस्थितियों की कड़ियों का स्पष्ट और विश्वसनीय होना जरूरी होता है, ताकि उनसे अपराध में आरोपियों की संलिप्तता संदेह से परे स्थापित हो सके।
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ इस स्तर के साक्ष्य प्रस्तुत करने में सफल नहीं रहा। पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी अंकित के कथित बयान के आधार पर अन्य लोगों के नाम सामने आए थे, लेकिन पुलिस हिरासत में दिए गए बयान को मात्र उसके आधार पर अन्य आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध करने के लिए स्वीकार्य साक्ष्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में आरोपी अंकित की मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो गई थी।
वादी और मृतक के भतीजे ने भी नहीं किया बयानों का समर्थन
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को उस समय झटका लगा, जब वादी विजयपाल सिंह और मृतक के भतीजे अमरनाथ अदालत में अपने पूर्व पुलिस बयानों के समर्थन में नहीं आए। दोनों ने अदालत में कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि गौतम सिंह की हत्या किसने की थी।
गवाहों के अपने पूर्व बयानों का समर्थन नहीं करने से अभियोजन पक्ष के मामले को और मजबूती नहीं मिल सकी। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की अनुपस्थिति और अन्य साक्ष्यों की कमी के बीच अदालत के सामने आरोपियों की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बन पाया।
हत्या में प्रयुक्त डंडा और चोरी हुई मोटर भी बरामद नहीं हुई
मामले में अभियोजन पक्ष के लिए एक अन्य कमजोर कड़ी हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए डंडे और खेत से चोरी हुई मोटर की बरामदगी नहीं होना भी रही। इन वस्तुओं की बरामदगी नहीं हो पाने से अभियोजन के दावों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
संदेह से परे आरोप साबित नहीं होने पर सुनाया फैसला
मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत सामग्री पर विचार करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने चारों आरोपियों हसरत, इस्माईल, इरफान उर्फ हीरो और खलील को बरी कर दिया। अदालत का फैसला इस आधार पर रहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हुआ।
करीब बारह वर्ष पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के साथ ही चारों आरोपियों को राहत मिली।

