सीजेआई ने संविधान का मसौदा तैयार करने में वकीलों के योगदान को याद किया

नागपुर। प्रधान न्यायाधीश यू.यू. ललित ने रविवार को कहा कि संसद में वकीलों की संख्या घट रही है, जबकि देश के संविधान का मसौदा तैयार करने वाले ज्यादातर लोग कानून के पेशे से थे। उन्होंने महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर द्वारा यहां आयोजित एक अभिनंदन कार्यक्रम में यह बात कही। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) ने कानून के पेशे से जुड़े रहे अतीत के महान नेताओं और संविधान का मसौदा तैयार करने में उनके योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में वकीलों का प्रतिशत घट रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा देश स्वतंत्रता संघर्ष के समय से ही कानूनी प्रतिभाओं से लाभान्वित रहा है। एक वकील आमतौर पर सामाजिक समस्याओं या संवैधानिक मुद्दों का समाधान तलाशने के बारे में सोचता है। वह समाज के समक्ष मौजूद समस्याओं से निपटने में अन्य की तुलना में अधिक सक्षम होता हैं।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यही कारण है कि भारत और समाज के लिए तथा स्वतंत्रता संघर्ष में योगदान देने वाले लोग मुख्य रूप से वकील थे। आज, (संसद के) दोनों सदनों में वकीलों का प्रतिशत घट रहा है।’’

उन्होंने कहा कि न्यायिक ढांचे के ‘पिरामिड’ में सभी प्रतिभा शीर्ष स्तर पर हैं, जबकि दुर्भाग्य से मध्य और निचले स्तर पर प्रतिभाशाली युवा एवं वकील नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें न्यायिक ढांचे के निचले स्तर पर प्रतिभा संपन्न लोगों को लाना होगा।’’ कानून के छात्रों से बातचीत के दौरान यह पूछे जाने पर कि क्या न्यायपालिका सही दिशा में बढ़ रही है, न्यायमूर्ति ललित ने कहा, ‘‘हमारा देश कानून के शासन से चलता है। सत्य की जीत होगी और देश में इसी तरह के लोकाचार हैं तथा न्यायपालिका अपवाद नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब एक विषय अदालत में आता है तब दोषी को दंड मिलना चाहिए और जिस किसी के साथ गलत किय गया हो उसे कानून का संरक्षण मिलना चाहिए।’’ सीजेआई ने कहा, ‘‘यह न्यायपालिका का कर्तव्य है और हमें यह करने का प्रयास करना होगा।’’ उन्होंने कहा कि जिला न्यायाधीशों और उच्चतर न्यायपालिका के बीच संपर्क नहीं है, इसलिए एक ऐसी प्रणाली होनी चाहिए जिसमें दोनों समूह आपस में मिलजुल सकें ताकि समस्या दूर हो। न्यायमूर्ति ललित ने 49वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में पिछले हफ्ते पद की शपथ ली थी।

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