जम्मू विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर ने मौत से पहले कमरे में मौजूद बोर्ड पर हिंदी में लिखा कि सब सच है क्योंकि कहानी झूठी है। फंदा लगाने के एक घंटा पहले ही एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर को उनका निलंबन पत्र मिला था, जिस पर लिखा था कि आपके खिलाफ जांच रिपोर्ट लंबित होने और इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

आप मनोविज्ञान विभाग में प्रवेश नहीं करेंगे और किसी तरह की पढ़ाई नहीं कराएंगे। जब तक जांच पूरी नहीं होती आप आप रजिस्ट्रार कार्यालय में अटैच रहेंगे। मामले की जांच करने पहुंची पुलिस को मौका-ए-वारदात से चंद्रशेखर का मोबाइल फोन भी मिला है, जिसको जब्त कर लिया गया है। साथ ही उस बोर्ड को भी कब्जे में ले लिया है कि जिस पर चंद्रशेखर ने मरने से पहले लिखा कि सब सच है क्योंकि कहानी झूठी है। नीचे अपने हस्ताक्षर किए हुए हैं, जिसके साथ 7 सितंबर 2021 की तिथि लिखी है।

सच क्या है?
फंदा लगाने से पहले एसोसिएट प्रोफेसर बड़ा सवाल खड़ा कर गए हैं। सब सच है, क्योंकि कहानी झूठी है। यह बात उन्होंने बोर्ड पर लिख दी, अब इसका जवाब बड़ा सवाल है। इसकी आने वाले दिनों में जांच होगी।
आप मनोविज्ञान विभाग में प्रवेश नहीं करेंगे और किसी तरह की पढ़ाई नहीं कराएंगे। जब तक जांच पूरी नहीं होती आप आप रजिस्ट्रार कार्यालय में अटैच रहेंगे। मामले की जांच करने पहुंची पुलिस को मौका-ए-वारदात से चंद्रशेखर का मोबाइल फोन भी मिला है, जिसको जब्त कर लिया गया है। साथ ही उस बोर्ड को भी कब्जे में ले लिया है कि जिस पर चंद्रशेखर ने मरने से पहले लिखा कि सब सच है क्योंकि कहानी झूठी है। नीचे अपने हस्ताक्षर किए हुए हैं, जिसके साथ 7 सितंबर 2021 की तिथि लिखी है।

