संभल में मस्जिद पर चला बुलडोजर; सपा सांसद बर्क बोले-‘हिम्मत है तो फांसी दे दो’

संभल में मस्जिद पर चला बुलडोजर; सपा सांसद बर्क बोले-‘हिम्मत है तो फांसी दे दो’

संभल। उत्तर प्रदेश के संभल में सरकारी जमीन पर बनाई गई मुस्तफा कादरी मस्जिद के खिलाफ प्रशासन का बुलडोजर जारी रहा। मस्जिद के बाकी हिस्सों को बुलडोज किया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने नाराजगी जाहिर की है। मस्जिद परिसर से ‘आई लव मोहम्मद’ वाले पोस्टर और एक झंडा मिलने का दावा किया गया है, जिसकी जांच की जा रही है।

 

समाजवादी पार्टी से सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने संभल में मस्जिद पर हुई बुलडोजर कार्रवाई पर तीखा हमला बोला है। रविवार को इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि आई लव मोहम्मद के पोस्टर को लेकर आप किस धारा के तहत केस दर्ज कर सकते हैं, मैं अपनी बात को दोहराता हूं कि मैं आई लव मोहम्मद कहता हूं, हिम्मत है तो मुझे फांसी दे दो। उन्होंने कहा कि हरे रंग का झंडा हमारे मजहब से ताल्लुक रखता है। इसे आप पाकिस्तान या फिर दूसरे देश से कैसे जोड़ सकते हैं? हरा झंडा पाकिस्तान या बांग्लादेश का प्रतीक नहीं है, बल्कि ईद-मिलादुन्नबी जैसे धार्मिक अवसरों पर मुसलमानों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला धार्मिक झंडा है। जियाउर्रहमान बर्क ने आरोप लगाया कि अधिकारी मुद्दे को भटकाने के लिए प्रोपेगैंडा कर रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि संभल में मस्जिद, मदरसे, कब्रिस्तान, ईदगाह और मजारों को लगातार टारगेट किया जा रहा है। यह भाजपा सरकार की नीति है, जो चुनावी फायदे के लिए हिंदू-मुस्लिम विभाजन करती है। उन्होंने कहा कि हमारा काम लोगों को बांटना नहीं है। हम सब एक हैं और भाजपा को हटाना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर गलत रिपोर्ट दर्ज की गई तो कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी को एक साथ रहना चाहिए और हम भाजपा को हटाने के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं, लेकिन कल संभल में जो हुआ, मैं उस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं जो जल्दबाजी में और गलत ऑर्डर पर की गई। मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जुल्म की इंतिहा हो गई। लाख कोशिशों, गुजारिशों और कानूनी प्रयासों के बावजूद सम्भल प्रशासन द्वारा कसेरवा गांव में मस्जिद को शहीद कर दिया गया।

 

ऐसा महसूस होता है कि अधिकारियों द्वारा आंखों पर पट्टी बांधकर एक तय निशाने के साथ कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है। जब लोगों की फरियाद, कानूनी दलीलें भी न सुनी जाएं तो इंसाफ पर भरोसा कमजोर पड़ने लगता है। याद रखिए, भारत का संविधान किसी को भी कानून से ऊपर होने की इजाजत नहीं देता। यह मुल्क किसी व्यक्ति, दल या सत्ता की जागीर नहीं है। मस्जिद के शहीद किए जाने के बाद पूरे गांव में गम, दर्द और मातम का माहौल है। मां-बहनों की आंखें अश्कबार हैं, बच्चे सहमे हुए हैं और हर दिल इस मंजर को देखकर दुखी है। अगर किसी को यह लगता है कि ताकत के दम पर लोगों की आवाज दबा दी जाएगी, तो यह उसकी गलतफहमी है।

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