शैक्षणिक संस्थान शिक्षा के केंद्र हैं, राजनीतिक मंच नहीं- फखरुल चंद हसन

शैक्षणिक संस्थान शिक्षा के केंद्र हैं, राजनीतिक मंच नहीं- फखरुल चंद हसन

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल चंद हसन ने शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी हाल में शैक्षणिक परिसरों को राजनीति का अड्डा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थाएं ज्ञान और शिक्षा के केंद्र हैं, न कि राजनीतिक मंच। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वहां नारों या धार्मिक संदर्भों की बात होती है तो उस पर अनावश्यक विवाद नहीं होना चाहिए, लेकिन संस्थानों की मूल गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है।

 

फखरुल चंद हसन ने कहा, “समाजवादी पार्टी मानती है कि शिक्षण संस्थानों में किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि नहीं होनी चाहिए। जहां तक नारों की बात है तो नारों से किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। प्रभु श्रीराम का नाम लेने से भी किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, लेकिन किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम को शिक्षण संस्थानों में नहीं होना चाहिए।” नीट परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा, “नीट परीक्षा बिना किसी पेपर लीक के पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। छात्रों का भविष्य अंधकार में नहीं जाना चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए।” इसी दौरान उन्होंने विपक्षी गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं और दोनों ही दल उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

 

उन्होंने कहा कि संगठनात्मक मजबूती, कमियों को दूर करना और बूथ स्तर तक तैयारी करना हर दल का स्वाभाविक काम है। उन्होंने आगे कहा कि गठबंधन का मूल धर्म यही होता है कि जो भी सीट जिस दल के हिस्से में आएगी, वहां संयुक्त प्रत्याशी उतारा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों मिलकर सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही हैं और अंततः लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी को हराना है। उन्होंने कहा कि दोनों दलों की तैयारियां अलग-अलग स्तर पर चल रही हैं, लेकिन अंतिम उद्देश्य एक ही है। उन्होंने कहा, “गठबंधन का मतलब ही यही है कि सभी दल मिलकर चुनाव लड़ें और भाजपा को सत्ता से बाहर करें।” उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी अपने पीडीए विचार के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी दबाव में आने वाली नहीं है। हम अपने हक और सम्मान की लड़ाई लगातार लड़ते रहेंगे।” उत्तर प्रदेश सरकार के एक मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए फखरुल चंद हसन ने कहा कि सरकार जनता के पैसों पर चलती है, न कि किसी व्यक्तिगत नेतृत्व के पैसे पर।

 

उन्होंने कहा कि जो राशन, ईंधन और अन्य सुविधाएं जनता को मिल रही हैं, वे जनता के टैक्स से ही उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार जनता के पैसे से योजनाएं चला रही है, तो नेताओं को इसका श्रेय स्वयं नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो भी राशन या सुविधाएं दी जा रही हैं, वह जनता के टैक्स के पैसे से दी जा रही हैं। मंत्री या नेता अपने निजी पैसे से कुछ नहीं दे रहे हैं, इसलिए उन्हें बयान देने से पहले इस बात को समझना चाहिए।” पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर दर्ज मामले को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को डराने और दबाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी और पूरा इंडिया गठबंधन इससे डरने वाला नहीं है। उन्होंने अमेरिका द्वारा ओमान के तट पर किए गए हमले का जिक्र किया और कहा कि इस घटना में भारतीय नागरिकों की मौत होना बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर सख्त प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी, लेकिन वैसा नहीं हुआ, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को अपने नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और इस तरह की घटनाओं पर मजबूत कूटनीतिक प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

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