मोरना (मुजफ्फरनगर)। पौराणिक तीर्थ नगरी शुकतीर्थ को जिला मुख्यालय मुजफ्फरनगर से जोड़ने वाला प्रमुख मोरना-मुजफ्फरनगर मार्ग इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है। मोरना कस्बे के घनी आबादी वाले क्षेत्र से गुजरने वाली मुख्य सड़क जगह-जगह टूट चुकी है और बीच सड़क पर बने गहरे गड्ढे राहगीरों व वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। बरसात के चलते इन गड्ढों में लगातार जलभराव हो रहा है, जिससे उनकी गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। परिणामस्वरूप आए दिन लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं और स्थानीय लोगों के साथ-साथ शुकतीर्थ आने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है। बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सड़क पर बने गहरे गड्ढों और चारों ओर फैली कीचड़ के कारण पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर समाजसेवी मा. ऋषिपाल सिंह ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कोई साधारण ग्रामीण मार्ग नहीं, बल्कि जनपद का अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पौराणिक तीर्थ शुकतीर्थ पहुंचते हैं। इसके अलावा हल्के और भारी वाहनों के साथ-साथ एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं का भी चौबीसों घंटे आवागमन इसी मार्ग से होता है। इतना ही नहीं, शुकतीर्थ आने वाले मंत्री, जनप्रतिनिधि, शासन के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक अमले के वाहन भी इसी सड़क से गुजरते हैं। इसके बावजूद वर्षों से सड़क की बदहाल स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बरसात के मौसम में सड़क पर बने गड्ढे पानी से पूरी तरह भर जाते हैं। ऐसे में वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई दिखाई नहीं देती और विशेष रूप से दुपहिया वाहन चालक संतुलन खोकर गिर जाते हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। वहीं मोरना के मुख्य बाजार क्षेत्र में सड़क के दोनों ओर फैली कीचड़ के कारण पैदल चलने वाले लोगों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। गुजरते वाहनों से गंदा पानी राहगीरों के कपड़ों पर उछल जाता है और फिसलने का खतरा हर समय बना रहता है।
मुजफ्फरनगर-शुकतीर्थ लिंक मार्ग के कई हिस्सों में सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है। जलभराव के कारण छोटे वाहनों के कलपुर्जे खराब हो रहे हैं, जबकि भारी वाहनों और एम्बुलेंस के फंसने की आशंका भी बनी रहती है। इससे आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं, जो किसी गंभीर स्थिति में बड़ी समस्या का कारण बन सकती हैं।
मोरना निवासी विक्की शर्मा, मुकेन्द्र राठी, विनोद शर्मा, अंकित बालियान और हेमंत कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से कहा कि मुख्य मार्ग के बीच बना गहरा गड्ढा किसी भी समय बड़े हादसे की वजह बन सकता है। उनका कहना है कि रात के समय अंधेरा होने पर खतरा कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि गड्ढा दिखाई नहीं देता और वाहन चालक अचानक उसमें फंस जाते हैं।
ग्रामीणों और समाजसेवियों ने लोक निर्माण विभाग तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय तत्काल सड़क की मरम्मत कराई जाए। उन्होंने गड्ढों को भरवाने के साथ पूरे मार्ग का सुदृढ़ीकरण कराने की मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क को दुरुस्त नहीं कराया गया तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उनका कहना है कि तीर्थ नगरी शुकतीर्थ जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल को जोड़ने वाले मार्ग की ऐसी दुर्दशा प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय होनी चाहिए।

