शिक्षक विद्यार्थियो के जीवन के भविष्य का निर्माता होता है -डॉ. कुलदीप सारस्वत

शिक्षक विद्यार्थियो के जीवन के भविष्य का निर्माता होता है -डॉ. कुलदीप सारस्वत

गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोक्ष ।

गुरु बिन लिखै न सत्य कोई, गुरु बिन मिटैं न दोष। ।

कबीर दास ने भी गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा है कि संसार में रहने वाले लोगों, बिना गुरु के ज्ञान का मिलना असंभव है। मनुष्य अज्ञानता रुपी अंधकार मे तब तक भटकता रहता है, माया रूपी सांसारिक बंधनों मे जकड़ा हुआ रहता है जब तक कि उस पर गुरु कृपा नहीं हो जाती।

हमारे देश में शिक्षक दिवस सर्वप्रथम वर्ष 1962 में मनाया गया था। देश के पूर्व उप-राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के रूप में इस विशेष दिन को मनाया जाता है। वे एक शिक्षक थे, जिन्होंने शिक्षा क्षेत्र में अपने 40 वर्ष दिए। उनका शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनका जन्म 5 सितंबर को ही हुआ था। उप-राष्ट्रपति बनने के बाद सर्वप्रथम कुछ छात्रों ने मिलकर उनका जन्मदिन मनाना चाहा था। जिसे सुनते ही डॉ. राधाकृष्णन ने कहा कि मेरा जन्म दिवस मनाने से अच्छा है देश भर में शिक्षक दिवस मनाया जाए, तो मुझे गर्व होगा। तब से ही प्रत्येक वर्ष देश भर के विभिन्न कॅालेज, संस्थान, या स्कूलों में 05 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा है।

शिक्षक हमें इस योग्य बनाते हैं कि हम पूरी दुनिया में अंधकार होने के बाद भी प्रकाश की तरह जलते रहें। जिस तरह एक पक्की नींव ही ठोस और मजबूत भवन का निर्माण करती है, ठीक उसी प्रकार शिक्षक विद्यार्थी रूपी नींव को सुदृढ़ करके उस पर भविष्य में सफलता रूपी भवन खड़ा करने में सहायता करता है। एक शिक्षक ही है जो मनुष्य को सफलता की ऊंचाईयों तक पहुंचाता है और जीवन में सही और गलत को परखने का तरीका बताता है। कहा जाता है कि एक बच्चे के जीवन में उसकी मां पहली गुरू होती है, जो हमें इस संसार से अवगत कराती हैं। वहीं दूसरे स्थान पर शिक्षक होते है, जो हमें सांसारिक बोध कराते हैं। जिस प्रकार एक कुम्हार मिट्टी को बर्तन का आकार प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार शिक्षक छात्र के जीवन को मूल्यवान बनाता है। शिक्षक से हमारा संबंध बौद्धिक और आंशिक होता है।

हमें पूरे दिल से ये प्रतिज्ञा करनी चाहिये कि हम अपने शिक्षक का सम्मान करेंगे क्योंकि बिना शिक्षक के इस दुनिया में हम सभी अपूर्ण है।
हम सभी को एक आज्ञाकारी विद्यार्थी के रुप में अपने शिक्षक का दिल से अभिनंदन करने की आवश्यकता है और जीवनभर अध्यापन के अपने निस्स्वार्थ सेवा के लिये साथ ही अपने अनगिनत विद्यार्थीयों के जीवन को सही आकार देने के लिये उन्हें धन्यवाद देना चाहिये।

जीवन में शिक्षक का किरदार बहुत खास होता है, वे किसी के जीवन में उस बैकग्राउंड म्यूज़िक कि तरह होते हैं, जिसकी उपस्थिति मंच पर तो नहीं दिखती, परंतु उसके होने से नाटक में जान आ जाती है। ठीक इसी प्रकार हमारे जीवन मे एक शिक्षक की भी भूमिका होती है। शिक्षक के बिना हम शिक्षा को प्राप्त नहीं कर सकते। हम अपने जीवन में कितने ही बड़े और कामयाब इंसान क्यूं न बन जाएं, लेकिन हमें अपने शिक्षक को कभी नहीं भूलना चाहिए। शिक्षक एक पेड़ की तरह होता है, जो अपने सभी विद्यार्थियों पर ज्ञान की छांव हमेशा बनाए रखता है।

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