फलावदा। क्षेत्र के गांव दादूपुर स्थित प्राचीन श्री शिव मंदिर परिसर में चल रहे पूज्य पाद गुरुदेव ब्रह्मचारी कृष्ण दत्त महाराज (संस्थापक गुरुकुल लाक्षाग्रह बरनावा) की प्रेरणा से योग ऋषि स्वामी कर्मवीर महाराज के सानिध्य में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्र कल्याण चतुर्वेद पाच कुंडीय महायज्ञ के दूसरे दिन बागपत के प्रसिद्ध यज्ञ के ब्राह्म गुरुवचन शास्त्री, एवं आचार्य सौदान शास्त्री ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए अपने उपदेशों में बताया कि यज्ञ से ही मानव जीवन है उन्होंने मानव जीवन के चारो आश्रमो पर प्रकाश डालते हुए कहां की आज के समय में यज्ञ का महत्व मानव जीवन के लिए उतना ही जरूरी है जितना मानव अपना जीवन चलाने के लिए भोजन का प्रयोग करते हैं क्योंकि प्राचीन काल वैदिक मंत्रों द्वारा महायज्ञ में प्रदान की गई आहुति से निकली अग्नि किरणों से मानव जीवन की समस्त बीमारियों तो दूर हो ही जाती हैं। साथ में मानव और उसके परिजनों को भी सुख की प्राप्ति होती है इसलिए मानव जाति को यज्ञ के अनुशासन अनुरूप चलना चाहिए और संसार में फैल रहे प्रदूषण को समाप्त करने एवं पर्यावरण को सुंदर बनाने में यज्ञ का बहुत महत्वपूर्ण अहम योगदान है। इसलिए आज के समय में मानव को चाहिए कि अपने घरों में परिवार जनों के साथ प्रतिदिन चतुर्वेद पारायण यज्ञ का आयोजन करना चाहिए तभी जाकर मानव जाति को सुख की प्राप्ति होगी उसके बाद देवयज्ञ चतुर्वेद पारायण यज्ञ के पांचों महा कुंड में वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए सैकड़ों पुरुष महिलाओं के द्वारा आहुति प्रदान की गई। उसके उपरांत आचार्य देवा पाल शास्त्री द्वारा प्रवचन सुनाए गए प्रवचनों को सुनकर कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से आचार्या दीप्ति शर्मा, आचार्य ऋचा बहन, आचार्य देवेंद्र कुमार, सौरभ शास्त्री, आचार्य रवि दत्त शास्त्री, आचार्य निखिल शास्त्री, आचार्य कपिल शास्त्री, आचार्य प्रिंस शास्त्री, आचार्य मधु बहन, आचार्य निखिल कुमार शास्त्री–

के अलावा गांव के कर्मवीर आर्य,लोमेश पोसवाल आर्य, प्रदीप आर्य, महिपाल, कालूराम, ग्राम प्रधान अखिलेश, सुबोध कुमार, विजय विश्नोई आदि क्षेत्र के कई गांवों के सैकड़ों महिला पुरुषों द्वारा महायज्ञ में आहुति प्रदान की गई है महायज्ञ पूर्ण होने पर सभी महिला पुरुषों को प्रसाद वितरण कराते हुए भंडारे में भोजन कराया गया है इस दौरान श्री वैदिक युवा शक्ति भारत समिति के सभी कार्यकर्ता व्यवस्था प्रमुख रहे हैं
कार्यक्रम के आरंभ में –

1-प्रातः 6 बजे से 6:30 तक ब्राह्मयज्ञ संध्या
2– प्रातः 7:00 बजे से 10:15 तक देवयज्ञ (चतुर्वेद पारायण यज्ञ)
3– दोपहर के समय 12:30 से 2:00 बजे तक भजनों उपदेश
4– दोपहर बाद 3:00 बजे से 5:बजे तक देवयज्ञ (पारायण यज्ञ)
5– शाम5:30 से 5:45 बजे तक वेदों उपदेश
6– शाम 7:15 से 10:00 बजे देर रात तक भजन उपदेश