लोकतंत्र में जुर्म को भी जुर्म कहने की हिम्मत भी नहीं रखना दुर्भाग्यपूर्ण

सहारनपुर। पूर्व विधायक एवं सपा नेता इमरान मसूद ने पुलिस लाईन मंे पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि शुक्रवार के रोज दस जून को जो घटना घटी वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन इस घटना के पीछे जो हुआ वह उससे भी बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्व विधायक का कहना था कि चोर को उतनी ही सजा मिलनी चाहिये जितना उसका जुर्म हो। यदि चोर को लूटेरे अथवा डकैती की सजा मिले तो यह भी अन्याय है। एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जनपद के राजनेता किसी भी मामले में अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं भाग सकते। उन्हें लोगों के बीच जाकर समझा-बुझाना चाहिये जो कि उनका परम कर्तव्य है। आगे उन्होंने कहा कि मस्जिदें केवल इबादत के लिए हैं और लोगों को जुमे की नमाज़ के बाद अपने घरों को लौट जाना चाहिये था यदि प्रोटेस्ट करना ही था तो एक सिस्टम के दायरे में रहते हुए करना चाहिये था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अभी तक 84 लोगों को पकड़कर जेल भेज दिया है जबकि सैकड़ों लोगों को चिन्हित कर कार्यवाही करने की बात कही जा रही है। वह जिला प्रशासन से आह्वान करते हैं कि किसी भी निर्दोष के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिये और वह निर्दोषों को छुड़ाने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे। आगे उन्होंने कहा कि जिस प्रकार योगी सरकार में कानून व्यवस्था की मज़ाक उड़ाते हुए धज्जियां उड़ाई जा रही हैं ऐसे में फिर अदालतों की जरूरत ही क्या है ? जब प्रदेश सरकार व पुलिस प्रशासन इतना फास्ट हो गया है कि पकड़ते ही उसका जुर्म साबित कर मौके पर घरों को तोड़ने के रूप में सजा दी जा रही है। यह बहुत ही निंदनीय है। लोकतंत्र में जुर्म को भी जुर्म कहने की हिम्मत अगर नहीं होगी तो यह बहुत ही अफसोसनाक बात है। ऐसे मंे राजनीतिक संगठनों का खामोश रहना और अपनी जायज बात को भी पटल पर न रख पाना बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है।

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