लखीमपुर खीरी में रेप आरोपी के अवैध मकान पर चला बुलडोजर! सरकारी रास्ते की जमीन पर था कब्जा

लखीमपुर खीरी में रेप आरोपी के अवैध मकान पर चला बुलडोजर! सरकारी रास्ते की जमीन पर था कब्जा

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में सिंगाही थाना क्षेत्र में प्रशासन ने बुधवार को चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपित खलील के अवैध मकान को बुलडोजर से ढहा दिया। यह मकान सरकारी रास्ते की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाया गया था। उक्त अवैध मकान को लेकर प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर पहले ही बेदखली के आदेश पारित किए जा चुके थे।

जानकारी के अनुसार, सिंगाही थाना क्षेत्र में बीते रविवार को खलील (65) ने पैसे का लालच देकर मासूम चार साल की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का मामला प्रकाश में आया। घटना के बाद पीड़ित मासूम बच्ची को गंभीर हालत में बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त था। गुस्साई जनता और परिजनों ने आरोपित के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के साथ ही उसके अवैध मकान को भी जमींदोज करने की मांग उठाई। मामले की गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने आरोपित के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

तहसीलदार, कोर्ट का आदेश और नापजोख

जनता के आक्रोश और मांग के बाद हरकत में आए प्रशासन ने राजस्व टीम को मौके पर भेजकर जमीन की पैमाइश कराई। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि आरोपिता का मकान सरकारी रास्ते की जमीन पर अवैध रूप से बना हुआ है। इसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई शुरू की।

इस मामले में एसडीएम यदुवीर सिंह ने बताया कि मकान गिराने की यह कार्रवाई पूरी तरह से न्यायालय के पूर्व आदेश के आधार पर की गई है। अदालत ने पहले ही इस निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मानते हुए बेदखली का आदेश दे दिया था, जिसे प्रशासन ने आज अमल कराते हुए बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया है। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।

दो साल पूर्व जांच में भूखंड को हटाने के हो चुके थे आदेश

उक्त जमीन को लेकर दो साल पहले ग्राम सभा की ओर से बेदखली और जुर्माने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। मामला आगे चलकर तहसील कोर्ट तक पहुंच गया था। तत्कालीन तहसीलदार भीमचंद की अदालत ने 15 जुलाई 2024 को ही खलील के मकान को अवैध कब्जा मानते हुए उसे जमीन से बेदखल करने और 7,560 रुपये का जुर्माना वसूलने का आदेश जारी कर दिया था। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस आदेश की कॉपी वायरल होने के बाद कार्रवाई में हुई देरी को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल भी उठाए थे।

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