रिश्वतखोरी पड़ी भारी! CBI कोर्ट ने रेलवे गुड्स क्लर्क को सुनाई 4 साल की सजा, ₹7,200 लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था आरोपी

रिश्वतखोरी पड़ी भारी! CBI कोर्ट ने रेलवे गुड्स क्लर्क को सुनाई 4 साल की सजा, ₹7,200 लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था आरोपी

नई दिल्ली। लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने गुरुवार को रिश्वत के एक मामले में दुर्गेश बहादुर सिंह को दोषी ठहराते हुए चार साल की जेल और 10,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। दुर्गेश को उस समय गिरफ्तार किया गया था तो वह रायबरेली दरियापुर जंक्शन रेलवे स्टेशन पर गुड्स क्लर्क था। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने 13 अक्टूबर 2017 को मैसर्स आरडी सीमेंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ के डायरेक्टर की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी गुड्स क्लर्क दुर्गेश बहादुर सिंह ने कंपनी पर लगाए गए 1,26,000 रुपए के डेमरेज चार्ज (देरी पर शुल्क) को काफी कम करने के लिए 60,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी। कंपनी तय समय के भीतर एक रैक से कच्चा माल नहीं उतार पाई थी, इसलिए यह शुल्क लगाया गया था। बातचीत के बाद आरोपी कम किए गए डेमरेज चार्ज के तौर पर 37,800 रुपए और शिकायतकर्ता से 7,200 रुपए की अवैध रिश्वत लेने के लिए सहमत हो गया। शिकायत के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी को 7,200 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने आरोपी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ 30 नवंबर 2017 को चार्जशीट दाखिल की थी।

ट्रायल के बाद कोर्ट ने 30 जुलाई को आरोपी को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। इसके पहले सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे (एनईआर) के सीनियर डिविजनल मैटेरियल्स मैनेजर को 1.70 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) में रजिस्टर्ड एक प्राइवेट फर्म के मालिक की शिकायत के आधार पर 23 जुलाई को मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसकी कंपनी ने फरवरी और जून 2026 के बीच एनईआर, वाराणसी के सीनियर डिविजनल मैटेरियल्स मैनेजर के ऑफिस में 9.47 लाख रुपए का फर्नीचर सप्लाई किया था और सप्लाई के लिए पेमेंट का केवल कुछ हिस्सा ही मिला था।

 

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि रेलवे अधिकारी ने 15 जुलाई को फर्म के रुके हुए पेमेंट को प्रोसेस करने और भविष्य के पेमेंट में मदद करने के बदले 1.70 लाख रुपए रिश्वत मांगी। सीबीआई ने कहा कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को धमकी भी दी थी कि अगर रिश्वत की मांग पूरी नहीं की गई तो उसे भविष्य में कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिलेंगे। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने 23 जुलाई को जाल बिछाया और अधिकारी को 1.70 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।

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