मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने विभिन्न जनसरोकारों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से जुटाए गए चंदे का सार्वजनिक हिसाब देने की मांग करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों ने अपनी आस्था और विश्वास के साथ नकद धनराशि और आभूषण दान किए थे, इसलिए यह जानना जनता का अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरी पारदर्शिता के साथ चंदे का लेखा-जोखा सार्वजनिक करना चाहिए।

राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे के संबंध में गंभीर अनियमितताओं की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

गौ संरक्षण के मुद्दे पर भी टिकैत ने सरकार को घेरते हुए कहा कि गौशालाओं की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ संरक्षण के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जबकि कई गौशालाओं में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण गायों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि गौशालाओं की नियमित और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के गौ संरक्षण अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि गौशालाओं में व्यवस्थाओं को सुधारना समय की जरूरत है। सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने चाहिए ताकि गौ संरक्षण के उद्देश्य को सही मायनों में पूरा किया जा सके।
स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल उठाते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि इस योजना को लेकर आम जनता के बीच लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना के क्रियान्वयन में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से मांग की कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से बताया जाए कि सत्ता में आने पर वे स्मार्ट मीटर योजना को जारी रखेंगे या इसे समाप्त करेंगे, ताकि जनता के सामने उनकी नीति स्पष्ट हो सके।
कृषि और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए टिकैत ने कहा कि एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने से किया जाना चाहिए, न कि खाद्यान्न से। उन्होंने कहा कि अनाज का पहला उद्देश्य देश के लोगों का पेट भरना है। ऐसे में खाद्यान्न का उपयोग ईंधन उत्पादन के लिए करना उचित नहीं है। सरकार को इस नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने ऑस्ट्रेलिया से लगभग पचास लाख क्विंटल मक्का आयात किया है, जबकि देश के पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान अपनी मक्का की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यदि देश के किसानों की उपज को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है तो विदेशों से आयात करना किसानों के साथ अन्याय है।
राकेश टिकैत ने उर्वरकों की लगातार बढ़ती कीमतों, कालाबाजारी और नैनो उर्वरक की नीति पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर उचित दरों पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। सरकार को किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दों की लगातार अनदेखी की गई तो भारतीय किसान यूनियन आंदोलन को और व्यापक तथा तेज करने के लिए मजबूर होगी। उन्होंने कहा कि किसान अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।

