यूट्यूब देखकर सीखी करोड़ों की ठगी! 1.12 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी का मुजफ्फरनगर पुलिस ने किया खुलासा, तीन गिरफ्तार

यूट्यूब देखकर सीखी करोड़ों की ठगी! 1.12 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी का मुजफ्फरनगर पुलिस ने किया खुलासा, तीन गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर। जनपद की थाना नई मंडी पुलिस ने निवेश पर हर महीने 10 से 12 प्रतिशत मुनाफा और बड़े प्रोजेक्टों में 60 प्रतिशत तक हिस्सेदारी दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से फर्जी कंपनियों के दस्तावेज, नकली एग्रीमेंट और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि उन्होंने लोगों को ठगने का पूरा तरीका यूट्यूब पर वीडियो देखकर सीखा था। गिरोह ने खुद को ग्लोबल टेक रियलटी कम्पनी और जीटी एफएक्स ट्रेडिंग कम्पनी का संचालक बताकर करीब एक करोड़ 12 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

एसएसपी ने प्रेस वार्ता में किया बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने गुरुवार दोपहर पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि शामली निवासी अंकुश कौशिक सहित करीब 20 से 25 निवेशकों ने थाना समाधान दिवस में सामूहिक शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उनसे निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई है।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की, जिसमें बड़े स्तर पर सुनियोजित ठगी का खुलासा हुआ।

आलीशान ऑफिस और फर्जी दस्तावेजों से जीता निवेशकों का भरोसा

पुलिस जांच में सामने आया कि जुलाई 2025 के दौरान अभिषेक शर्मा नामक व्यक्ति ने निवेशकों की मुलाकात हरेन्द्र मलिया, दीपक चौधरी और प्रवीन कुमार से कराई थी। तीनों आरोपियों ने स्वयं को बड़ी कंपनियों का संचालक बताते हुए महावीर चौक स्थित अपना आलीशान कार्यालय दिखाया।

निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने फर्जी बैंक रिकॉर्ड, नकली प्रोजेक्ट रिपोर्ट, कूटरचित सरकारी दस्तावेज और एग्रीमेंट प्रस्तुत किए। कागजात इतने व्यवस्थित तरीके से तैयार किए गए थे कि निवेशकों को उन पर किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ।

रिसॉर्ट और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के नाम पर बुना ठगी का जाल

एसएसपी ने बताया कि आरोपियों ने डिजिटल माध्यमों का भी भरपूर इस्तेमाल किया। उन्होंने खतौली में प्रस्तावित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट, देहरादून के एक बड़े रिसॉर्ट और ऋषिकेश में विकसित हो रही आवासीय परियोजनाओं के नाम पर फर्जी वीडियो प्रेजेंटेशन तैयार किए।

इन वीडियो और दस्तावेजों के जरिए निवेशकों को विश्वास दिलाया गया कि उनका पैसा सुरक्षित रहेगा और हर महीने 10 से 12 प्रतिशत तक निश्चित लाभ मिलेगा। साथ ही प्रोजेक्ट में 60 प्रतिशत तक हिस्सेदारी देने का भी दावा किया गया। आरोपियों ने मूल धन पूरी तरह सुरक्षित रहने का भरोसा देते हुए कानूनी इकरारनामे भी तैयार किए।

इन झूठे दावों के झांसे में आकर उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों और जिलों के लोगों ने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल एक करोड़ 12 लाख रुपये आरोपियों के खातों में जमा करा दिए।

पहले लौटाया मुनाफा, फिर बंद कर दिया भुगतान

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने शुरुआत में निवेशकों का विश्वास मजबूत करने के लिए पोंजी स्कीम की तर्ज पर करीब 35 लाख रुपये रिटर्न के रूप में वापस किए। इससे लोगों का भरोसा और बढ़ गया और उन्होंने अधिक निवेश करना शुरू कर दिया।

जब आरोपियों के पास बड़ी रकम इकट्ठा हो गई तो उन्होंने भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया। निवेशकों द्वारा बार-बार पैसे वापस मांगने पर उन्हें टालमटोल किया गया और विरोध करने वालों को जान से मारने की धमकियां भी दी गईं।

जांच में फर्जी निकले सभी दस्तावेज

पुलिस की जांच में सामने आया कि जिन कंपनियों के नाम पर निवेश कराया गया, उनके दस्तावेज, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, एग्रीमेंट और विभिन्न सरकारी विभागों की कथित स्वीकृतियां पूरी तरह फर्जी थीं। आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से नकली कागजात तैयार कर लोगों को गुमराह किया और करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की।

जानसठ फ्लाईओवर के नीचे से हुई गिरफ्तारी

मामले में कार्रवाई करते हुए थाना नई मंडी पुलिस ने जानसठ फ्लाईओवर के नीचे घेराबंदी कर तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में हरेन्द्र मलिया पुत्र रणजीत सिंह निवासी बेगराजपुर थाना मंसूरपुर, दीपक चौधरी पुत्र मलीराम निवासी गांधी कॉलोनी थाना नई मंडी तथा प्रवीन कुमार पुत्र हुकुमचंद निवासी आर्यपुरी शेखपुर, मुजफ्फरनगर शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, दोनों फर्जी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज, नकली एग्रीमेंट और इकरारनामे बरामद किए हैं।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

थाना नई मंडी में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 326/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) में मुकदमा दर्ज किया गया है। आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।

यूट्यूब से सीखा ठगी का तरीका

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने किसी पेशेवर अपराधी से नहीं, बल्कि यूट्यूब पर उपलब्ध वीडियो देखकर निवेश के नाम पर लोगों को ठगने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और निवेशकों का विश्वास जीतने के तरीके सीखे थे। इसके बाद उन्होंने पूरी योजना बनाकर फर्जी कंपनियां तैयार कीं और सुनियोजित तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर डाली।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हैं तथा ठगी की रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। साथ ही अन्य संभावित पीड़ितों और आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *