मोरना (मुजफ्फरनगर)। मोरना ब्लॉक क्षेत्र के यूसुफपुर गांव में कथित अवैध कॉलोनाइजिंग का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अथाई मार्ग पर बिना मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण से लेआउट स्वीकृत कराए प्लाटिंग की जा रही है। इतना ही नहीं, कॉलोनी काटने वालों पर गांव के मुख्य जल निकासी वाले नाले को मिट्टी डालकर समतल करने और उसे प्लाटिंग में शामिल करने का भी आरोप लगाया गया है। नाला बंद होने से गांव का गंदा पानी सड़कों और रास्तों पर जमा हो रहा है, जिससे जलभराव के साथ दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।

यूसुफपुर निवासी शिकायतकर्ता राहुल समेत अन्य ग्रामीणों ने अधिकारियों को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि अथाई मार्ग पर नियमों और मानकों की अनदेखी कर धड़ल्ले से प्लाटिंग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कथित कॉलोनाइजर लोगों को महंगे दामों पर प्लाट बेच रहे हैं, जबकि इस तरह की गतिविधियों से सरकार को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।

नाला बंद होने से रास्तों पर भरा गंदा पानी
ग्रामीणों के मुताबिक प्लाटिंग के लिए गांव के मुख्य नाले में मिट्टी डालकर उसे समतल कर दिया गया। आरोप है कि नाले की जमीन को प्लाटिंग क्षेत्र में मिला दिया गया है। जल निकासी का रास्ता बंद होने के कारण घरों और आबादी से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों और रास्तों पर जमा हो रहा है।
जलभराव के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण इलाके में दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों की संख्या भी बढ़ गई है।
बीमारी फैलने का जताया खतरा
ग्रामीणों ने जलभराव को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो गंदे पानी और मच्छरों के कारण डेंगू, मलेरिया समेत अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नाले की तत्काल सफाई कराकर जल निकासी बहाल कराने की मांग की है।
MDA से स्थलीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण और शासन के उच्च अधिकारियों से अथाई मार्ग पर चल रही कथित अवैध प्लाटिंग की स्थलीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही सरकारी नाले को अतिक्रमण से मुक्त कराकर उसकी जल निकासी व्यवस्था बहाल कराने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि मौके पर जांच कराई जाती है तो प्लाटिंग से जुड़े निर्माण, लेआउट और जमीन के उपयोग से संबंधित स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बिना स्वीकृति प्लाटिंग पर कार्रवाई का प्रावधान
उत्तर प्रदेश में विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में निर्धारित नियमों के तहत भूमि का विकास और प्लाटिंग करने से पहले संबंधित प्राधिकरण से आवश्यक स्वीकृति और लेआउट पास कराना होता है। कृषि भूमि के आवासीय या व्यावसायिक उपयोग से पहले लागू भू-उपयोग संबंधी प्रक्रिया पूरी करना भी आवश्यक होता है। पात्र परियोजनाओं पर रियल एस्टेट नियामक कानून के तहत पंजीकरण संबंधी प्रावधान भी लागू होते हैं।
बिना स्वीकृति विकास कार्य या अवैध प्लाटिंग पाए जाने पर विकास प्राधिकरण की ओर से नियमानुसार नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई की जा सकती है। सरकारी नाले, रास्ते अथवा अन्य सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण मिलने पर उसे हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
खरीदारों के लिए भी जोखिम
अवैध कॉलोनियों में प्लाट खरीदने वाले लोगों के सामने बाद में कई तरह की परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। ऐसी कॉलोनियों में सड़क, नाली, सीवर और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति स्पष्ट नहीं होती। प्रशासन की ओर से अवैध कॉलोनी चिह्नित किए जाने की स्थिति में संबंधित संपत्तियों की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और अन्य प्रक्रियाओं पर भी नियमानुसार रोक या कार्रवाई का जोखिम रहता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यह स्पष्ट करे कि अथाई मार्ग पर की जा रही प्लाटिंग को संबंधित विभाग से आवश्यक स्वीकृति मिली है या नहीं। साथ ही नाले पर हुए कथित कब्जे की जांच कराकर गांव की जल निकासी व्यवस्था तत्काल दुरुस्त कराई जाए।

