मेरठ शास्त्रीनगर में दूसरे दिन भी चला बुलडोजर अभियान, सेटबैक हटाने पर लोगों का विरोध जारी

मेरठ शास्त्रीनगर में दूसरे दिन भी चला बुलडोजर अभियान, सेटबैक हटाने पर लोगों का विरोध जारी

मेरठ। शास्त्रीनगर क्षेत्र में सेटबैक खाली कराने के लिए आवास विकास परिषद का बुलडोजर अभियान रविवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। सुबह से ही आवास विकास विभाग के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और चिन्हित संपत्तियों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। अभियान के दौरान कई स्थानों पर मकान मालिकों और दुकानदारों ने विरोध जताया तथा अधिकारियों से तीखी बहस भी हुई।

अधिकारियों के अनुसार अभियान से पहले सभी संबंधित संपत्ति स्वामियों को नोटिस जारी किए गए थे और निर्धारित समय सीमा के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर भी दिया गया था। इसके बावजूद सेटबैक खाली नहीं किए जाने पर विभाग ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की है।

शनिवार को अभियान के पहले दिन करीब एक दर्जन भूखंडों पर कार्रवाई की गई थी। वहीं कुछ संपत्ति स्वामियों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया गया था। रविवार को भी विभागीय टीम ने निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचकर कार्रवाई जारी रखी।

आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता अभिषेक राज ने बताया कि पूरे अभियान के दायरे में लगभग 860 संपत्तियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सभी चिन्हित स्थानों से सेटबैक खाली नहीं करा लिया जाता, तब तक अभियान लगातार जारी रहेगा।

इस मामले की सुनवाई आगामी 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होनी है। बताया जा रहा है कि आवास विकास परिषद को न्यायालय में सेटबैक खाली कराने संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। इसी के मद्देनजर विभाग ने कार्रवाई में तेजी लाई है।

उधर बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में सेक्टर-दो, सेक्टर-तीन और सेक्टर-चार के निवासियों का धरना भी जारी है। विशेष रूप से महिलाओं ने मोर्चा संभाल रखा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सेटबैक नहीं छोड़ेंगे और जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

धरना दे रही महिलाओं ने घोषणा की है कि वे आगामी एक सप्ताह तक धरना स्थल पर प्रतिदिन सुंदरकांड पाठ भी करेंगी। उनका कहना है कि यह संघर्ष अपने अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर जारी रहेगा।

बुलडोजर कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन के चलते शास्त्रीनगर क्षेत्र में पूरे दिन हलचल बनी रही। प्रशासन और आवास विकास विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जबकि प्रभावित लोग न्यायिक सुनवाई से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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