मेरठ में एसटीएफ की बडी कार्यवाही, लेखपाल भर्ती परीक्षा दे रहे दो साल्वर समेत चार गिरफ्तार

मेरठ। एसटीएफ मेरठ ने लेखपाल भर्ती परीक्षा में सेंधमारी कर रहे दो साल्वर समेत चार लोगों को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया है। इनमें एक अभ्यर्थी भी शामिल है। आरोपितों के पास से मोबाइल और जरूरी कागजात भी बरामद हुए हैं।

अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि सूचना मिली थी कि यूपी लेखपाल भर्ती परीक्षा में साल्वर गैंग सेंधमारी करने वाला है। सर्विलांस की मदद से पता चला कि गैंग मुरादाबाद में सक्रिय है। इंस्पेक्टर सुनील कुमार के नेतृत्व में टीम सबसे पहले मझोला थाना क्षेत्र में स्वरूप देवी मेमोरियल इंटर कालेज पहुंची और सेंटर के बाहर मौजूद अभ्यर्थी संदीप निवासी तिलवाड़ा थाना छपरौली बागपत को पकड़ लिया। इसके बाद सेंटर में उसकी जगह परीक्षा दे रहे मोहित निवासी पट्टी कल्याणपुर, जिला सोनीपत, हरियाणा को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में उसने बताया कि सिविल लाइंस के पंडित मदन मोहन स्वरूप पब्लिक स्कूल में भी एक साल्वर परीक्षा दे रहा है। टीम वहां पहुंची और आशीष की जगह परीक्षा दे रहे साल्वर रविंद्र निवासी गोहाना, सोनीपत, हरियाणा को पकड़ लिया। इस दौरान गिरोह के सरगना सुमित निवासी बागपत के करीबी सदस्य नीरज निवासी चिराना, थाना बरोदा, सोनीपत को भी पकड़ लिया। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि साल्वर को 25-25 हजार रुपये में परीक्षा देने की बात तय हुई थी। अभ्यर्थियों से पांच-पांच लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। गिरोह का सरगना सुमित फरार है। उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

एएसपी ने बताया कि साल्वर नीरज और संदीप ने बताया है कि वह पहले भी पकड़े जा चुके हैं। 2018 में संदीप की मुलाकात नीरज से हुई थी। यूपी पुलिस की परीक्षा में संदीप की जगह नीरज परीक्षा दे रहा था। तब भी दोनों को पकड़ लिया गया था। संदीप ने तब सुमित और नीरज को पांच लाख रुपये दिए थे लेकिन पकड़े जाने के बाद रुपये नहीं मिले। इस बार उससे सिर्फ साल्वर के 25 हजार रुपये लिए गए थे। साल्वर गिरोह का सरगना सुमित कई परीक्षाओं में सेंधमारी कर चुका है। उस पर कई मुकदमे दर्ज हैं। जल्द ही उसे दबोच लिया जाएगा। अब उस पर इनाम की तैयारी की जा रही है। जल्द ही इसकी संस्तुति हो जाएगी।

पूछताछ में नीरज ने बताया कि परीक्षा का फार्म भरने से पहले ही अभ्यर्थी से बातचीत हो जाती है। इसलिए फार्म भरते समय ऐसे फोटो का इस्तेमाल किया जाता है जो साफ न हो। इसके बाद उसे फार्म पर लगा दिया जाता है ताकि परीक्षा के दौरान साल्वर केंद्र में चला जाए। कम से कम पांच लाख रुपये में बात तय होती है।

लेखपाल की भर्ती में अभी फिंगर प्रिंट की जांच नहीं होती है। इसकी जानकारी गिरोह को थी। इसलिए उसने फोटो से थोड़ी छेड़छाड़ की और फिर परीक्षा देने आ गए। उन्होंने बताया कि फिंगर प्रिंट नहीं होने की वजह से ही सौदेबाजी हुई थी।

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