मुजफ्फरनगर। नशे के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं की खरीद-बिक्री को लेकर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो दिल्ली की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मोरना के नीलम मेडिकल स्टोर पर पूर्व में हुई कार्रवाई के बाद अब जांच की कड़ियां जनपद के तीन गांवों में स्थित चार अन्य मेडिकल स्टोरों तक पहुंच गई हैं। बुधवार को दिल्ली से पहुंची नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने चारों मेडिकल स्टोरों पर पहुंचकर दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़े अभिलेखों की जांच की और संचालकों से आवश्यक जानकारी जुटाई। टीम ने संबंधित संचालकों को नोटिस जारी कर नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं की खरीद, बिक्री और आपूर्ति से संबंधित विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है।

नीलम मेडिकल स्टोर से शुरू हुई जांच
बताया गया है कि कुछ दिन पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो दिल्ली की टीम ने मोरना क्षेत्र स्थित नीलम मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई की थी। इस दौरान टीम ने मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध दवाओं के साथ ही खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेज और अन्य अभिलेखों की जांच की थी। इसी जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर अब जांच का दायरा अन्य मेडिकल स्टोरों तक बढ़ाया गया है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नारकोटिक्स श्रेणी में आने वाली दवाओं की खरीद किन मेडिकल स्टोरों से की गई, इन दवाओं की आपूर्ति किसके माध्यम से हुई और मेडिकल स्टोरों पर उनकी बिक्री का रिकॉर्ड किस तरह रखा गया। इसी क्रम में टीम ने बुधवार को अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर अभिलेखों की पड़ताल की।
बसेड़ा, भोकरहेड़ी और बेलड़ा में जांच
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम बुधवार को बसेड़ा स्थित भारत मेडिकल स्टोर, भोकरहेड़ी स्थित निशांत मेडिकल स्टोर तथा बेलड़ा स्थित न्यू चौधरी मेडिकल स्टोर और लवली मेडिकल स्टोर पहुंची। टीम ने मेडिकल स्टोर संचालकों से नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं की खरीद और बिक्री के संबंध में जानकारी ली।
जांच के दौरान दवाओं की खरीद से संबंधित रिकॉर्ड, उपलब्ध अभिलेख और अन्य दस्तावेजों के बारे में जानकारी जुटाई गई। टीम ने संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों को नोटिस भी जारी किए हैं। नोटिस के माध्यम से दवाओं की खरीद की तारीख, खरीदी गई दवाओं की मात्रा, आपूर्तिकर्ता, बिक्री का विवरण और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है।
खरीद और आपूर्ति की पूरी कड़ी खंगाल रही टीम
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच केवल मेडिकल स्टोरों पर उपलब्ध दवाओं और उनके रिकॉर्ड तक सीमित नहीं बताई जा रही है। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नारकोटिक्स श्रेणी की दवाएं मेडिकल स्टोरों तक किन स्रोतों से पहुंचीं और उनकी खरीद तथा बिक्री किस प्रक्रिया के तहत हुई।
दवाओं की खरीद और बिक्री से संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर आपूर्ति श्रृंखला की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। रिकॉर्ड में किसी तरह का अंतर मिलने पर जांच उसी दिशा में आगे बढ़ सकती है। फिलहाल मेडिकल स्टोर संचालकों को नोटिस जारी किया जाना जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।
जिला औषधि निरीक्षक देशबंधु विमल के अनुसार, मोरना के नीलम मेडिकल स्टोर से जुड़े प्रकरण में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच आगे बढ़ रही है। अन्य मेडिकल स्टोरों से नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं की खरीद से संबंधित जानकारी सामने आने के बाद टीम ने बुधवार को चार मेडिकल स्टोरों पर पहुंचकर पूछताछ और अभिलेखों की जांच की।
औषधि विभाग भी रख रहा नजर
मामले में औषधि विभाग की ओर से भी नजर रखी जा रही है। नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं की बिक्री को लेकर निर्धारित नियमों और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी मेडिकल स्टोर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
बुधवार को दिल्ली से आई टीम के अचानक अलग-अलग मेडिकल स्टोरों पर पहुंचने और दस्तावेजों की जांच किए जाने से संचालकों में भी हलचल रही। टीम ने मौके पर संचालकों से जानकारी लेने के साथ उन्हें नोटिस देकर आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब संबंधित संचालकों को जांच टीम के समक्ष मांगी गई जानकारी और दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
मोरना के एक मेडिकल स्टोर से शुरू हुई कार्रवाई का दायरा अब तीन गांवों के चार अन्य मेडिकल स्टोरों तक पहुंच चुका है। इससे स्पष्ट है कि जांच एजेंसी नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़ी कड़ियों की पड़ताल कर रही है। हालांकि, अभी तक इन चार मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ किसी अनियमितता या अपराध की पुष्टि नहीं हुई है।
नोटिस जारी किया जाना अपने आप में किसी अपराध की पुष्टि नहीं करता। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या किसी अन्य अनियमितता के तथ्य सामने आते हैं तो उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

