मेरठ। पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मौत की सजा पाने वाली मुस्कान की 10 माह की बेटी मन्नत उर्फ राधा की परवरिश का जिम्मा उठाने के लिए मुंबई के इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी आगे आए हैं। उन्होंने बच्ची की पढ़ाई-लिखाई, पालन-पोषण और शादी तक के खर्च उठाने की पेशकश की है। बुधवार को फैजान ने मेरठ में जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे से मुलाकात कर अपनी इच्छा जताई।

फैजान अंसारी ने कहा कि बच्ची को उसकी मां के कथित अपराध की सजा नहीं मिलनी चाहिए। उनका उद्देश्य बच्ची को बेहतर शिक्षा और अच्छा माहौल उपलब्ध कराना है, ताकि वह इस मामले से जुड़ी पीड़ा से दूर रहकर अपना भविष्य संवार सके। उन्होंने यह भी कहा कि वह मुस्कान को मिली मौत की सजा के पक्ष में हैं, लेकिन बच्ची की परवरिश और भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।

डीजीसी से मुलाकात कर रखी पेशकश
बुधवार दोपहर फैजान अंसारी जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने राधा के पालन-पोषण और भविष्य के खर्च उठाने की इच्छा जताई। फैजान के मुताबिक, वह बच्ची की शिक्षा से लेकर उसकी शादी तक की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि बच्ची का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए और उसे बेहतर वातावरण मिलना चाहिए। फैजान इससे पहले भी जरूरतमंद लोगों की मदद करने का दावा कर चुके हैं। खबर के मुताबिक, सैफ अली खान पर हमले के दौरान घायल हुए एक ऑटो चालक की मदद भी उन्होंने की थी।
मेरठ जेल में मां के साथ रह रही है राधा
मुस्कान को पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में 14 अक्टूबर को मौत की सजा सुनाई गई थी। राधा का जन्म 24 नवंबर 2025 को हुआ था और वह फिलहाल मेरठ जिला जेल में अपनी मां के साथ रह रही है। मुस्कान की बड़ी बेटी पीहू की जिम्मेदारी उसके परिजन संभाल रहे हैं।
राधा की परवरिश को लेकर फैजान की पेशकश के बाद बच्ची की देखभाल और भविष्य से जुड़ा मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, बच्ची को किसके संरक्षण में दिया जाएगा, इसका फैसला संबंधित नियमों और प्रक्रिया के तहत ही हो सकेगा।
शबनम के बेटे को भी दंपती ने लिया था गोद
अमरोहा के चर्चित बावनखेड़ी हत्याकांड में मौत की सजा पाने वाली शबनम के बेटे ताज को बुलंदशहर के उस्मान सैफी और उनकी पत्नी वंदना ने गोद लिया था। अप्रैल 2008 में शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी थी। घटना के समय वह गर्भवती थी और उसने दिसंबर 2008 में रामपुर जेल में बेटे को जन्म दिया था।
बच्ची की देखभाल को लेकर क्या हैं नियम?
जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के अनुसार, जेल में बंद महिला कैदी के साथ रह रहे बच्चे को गोद देने या उसकी देखभाल की व्यवस्था करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है। इसमें संबंधित प्रशासन और जिला बाल कल्याण समिति की भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि महिला कैदी की सहमति सहित आवश्यक प्रक्रिया के बाद ही इस संबंध में निर्णय लिया जा सकता है।
चौबे के अनुसार, नियमानुसार बच्चे को तीन वर्ष की आयु से पहले गोद देने के लिए किसी को नहीं सौंपा जा सकता। बच्चा अधिकतम छह वर्ष की आयु तक मां के साथ जेल में रह सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि राधा के मामले में मुस्कान के मायके और ससुराल, दोनों पक्षों के परिजन मौजूद हैं। यदि दोनों में से कोई पक्ष बच्ची की जिम्मेदारी लेना चाहता है, तो मां की सहमति और लागू नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। ऐसे में फैजान अंसारी की पेशकश पर अंतिम निर्णय संबंधित अधिकारियों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होगा।
