मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना क्षेत्र में सरकारी वाहन के कथित निजी इस्तेमाल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ युवक ऐसी सरकारी गाड़ी के भीतर बैठे नजर आ रहे हैं, जिसके फ्रंट शीशे पर एसडीएम लिखा दिखाई दे रहा है। वीडियो में हूटर बजने की आवाज सुनाई देने का भी दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी वाहन के इस्तेमाल और उसकी निगरानी को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

शनिवार शाम करीब सात बजे सोशल मीडिया पर सामने आया यह वीडियो बुढ़ाना क्षेत्र के मेरठ करनाल हाईवे का बताया जा रहा है। हालांकि वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। सोशल मीडिया पर वीडियो को करीब एक महीने पुराना बताया जा रहा है। वीडियो में कुछ युवक सरकारी वाहन के अंदर बैठकर कैमरे के सामने रील बनाते दिखाई दे रहे हैं।

रील बनाने के दौरान सरकारी वाहन का हूटर बजने की आवाज सुनाई देने की बात भी कही जा रही है। बाद में वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया, जहां से यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी वाहन के निजी इस्तेमाल को लेकर तरह तरह के सवाल उठने लगे हैं।
एसडीएम लिखी गाड़ी में युवकों की मौजूदगी से सवाल
वायरल वीडियो में वाहन के फ्रंट शीशे पर एसडीएम लिखा दिखाई देना इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू माना जा रहा है। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर वाहन को बुढ़ाना एसडीएम के सरकारी वाहन के रूप में बताया जा रहा है। हालांकि वाहन वास्तव में किस अधिकारी के आधिकारिक उपयोग में था और वीडियो किस समय बनाया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
यदि वाहन सरकारी अधिकारी के लिए निर्धारित वाहन है तो उसमें निजी तौर पर रील बनाए जाने की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। यह भी जांच का विषय है कि सरकारी वाहन तक युवकों की पहुंच कैसे हुई और उन्हें वाहन के अंदर बैठकर वीडियो बनाने की अनुमति किस स्तर से मिली।
पूर्व चालक के परिवार से जुड़े होने का दावा
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों को बुढ़ाना एसडीएम के पूर्व चालक साजिद के परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। युवकों की वास्तविक पहचान, सरकारी वाहन में उनकी मौजूदगी और वाहन के इस्तेमाल की परिस्थितियों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
ऐसे में वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी तय करना जल्दबाजी होगी। पूरे मामले में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वीडियो करीब एक महीने पुराना है तो उस समय वाहन किसके पास था
मामले में वीडियो की कथित पुरानी तारीख भी महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है। यदि वीडियो वास्तव में करीब एक महीने पुराना है तो उस समय सरकारी वाहन किस अधिकारी या कर्मचारी के आधिकारिक उपयोग में था, इसकी जानकारी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।
इसके अलावा यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि वीडियो किस स्थान पर और किन परिस्थितियों में बनाया गया था। वाहन उस समय किसी सरकारी कार्य के लिए इस्तेमाल हो रहा था या किसी अन्य उद्देश्य से, यह भी जांच का विषय है।
सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर उठी बहस
वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी वाहनों के इस्तेमाल और उनकी निगरानी को लेकर बहस शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए उपलब्ध सरकारी वाहनों का उपयोग निर्धारित सरकारी कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। ऐसे में यदि किसी सरकारी वाहन में निजी रील बनाई गई है तो उसके पीछे की परिस्थितियों की जांच जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी पहचान वाले वाहन से इस तरह की रील सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था की छवि प्रभावित हो सकती है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वाहन उस समय किसके पास था और उसमें युवकों को बैठने की अनुमति कैसे मिली।
वीडियो की सत्यता और हूटर के इस्तेमाल की जांच जरूरी
फिलहाल वायरल वीडियो की वास्तविक रिकॉर्डिंग तारीख, उसमें दिखाई दे रहे युवकों की पहचान, वाहन के आधिकारिक उपयोगकर्ता और हूटर के इस्तेमाल की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आधिकारिक स्तर पर इस संबंध में जांच या कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी भी सामने नहीं आई है।
ऐसे में पूरे मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो में दिखाई दे रहा वाहन वास्तव में सरकारी एसडीएम वाहन था या नहीं, युवकों को उसमें बैठने की अनुमति किसने दी और हूटर का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया।

