मुजफ्फरनगर। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपने नेता अरशद राना के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी निष्कासन आदेश के मुताबिक यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। अरशद राना पर पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों के विपरीत काम करने, पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने तथा संगठन को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद मुजफ्फरनगर में पार्टी के संगठनात्मक हलकों में मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

AIMIM के मुजफ्फरनगर महानगर अध्यक्ष मास्टर खालिद ने 27 अक्टूबर 2026 को निष्कासन पत्र जारी कर अरशद राना के खिलाफ लिए गए फैसले की आधिकारिक जानकारी दी। पत्र में पार्टी के अनुशासन और संगठनात्मक मर्यादा का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि अरशद राना को छह वर्ष के लिए पार्टी से बाहर किया जा रहा है। आदेश के अनुसार निष्कासन की अवधि के दौरान वह पार्टी के सदस्य के रूप में किसी भी प्रकार की गतिविधि में भाग नहीं ले सकेंगे।

पार्टी की नीतियों के खिलाफ काम करने का आरोप
महानगर अध्यक्ष की ओर से जारी निष्कासन पत्र में अरशद राना पर लंबे समय से पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों के विपरीत गतिविधियों में संलिप्त रहने का आरोप लगाया गया है। पार्टी का कहना है कि उनके कथित व्यवहार और गतिविधियों से संगठन को नुकसान पहुंच रहा था। इसके अलावा, पार्टी के अन्य पदाधिकारियों के साथ अनुशासनहीन व्यवहार किए जाने की बात भी निष्कासन की कार्रवाई के पीछे बताई गई है।
पार्टी नेतृत्व ने इन आरोपों को संगठनात्मक अनुशासन से जुड़ा गंभीर मामला माना है। जारी आदेश के अनुसार, अरशद राना के खिलाफ मिली शिकायतों और उनकी कथित गतिविधियों की समीक्षा के बाद निष्कासन का फैसला लिया गया। हालांकि, सार्वजनिक किए गए पत्र में उन विशिष्ट घटनाओं, तारीखों या गतिविधियों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है, जिनके आधार पर आरोप तय किए गए।
छह साल तक पार्टी के नाम और मंच के इस्तेमाल पर रोक
निष्कासन की कार्रवाई के साथ ही पार्टी ने अरशद राना के लिए संगठन के नाम, पद और प्रतीक चिह्न के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी है। महानगर अध्यक्ष की ओर से स्पष्ट किया गया है कि निष्कासन की अवधि में वह किसी भी रूप में AIMIM का नाम लेकर, पार्टी के पदाधिकारी के तौर पर या उसके मंच का उपयोग करके गतिविधियां संचालित नहीं कर सकेंगे।
इस निर्देश का उद्देश्य पार्टी की आधिकारिक पहचान और संगठनात्मक गतिविधियों को निष्कासन के बाद भी स्पष्ट रूप से अलग रखना माना जा रहा है। पार्टी की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अरशद राना को अब निष्कासन की अवधि के दौरान संगठन की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकेगा।
शिकायतों की समीक्षा के बाद लिया गया फैसला
पार्टी की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, अरशद राना के खिलाफ पार्टी विरोधी और विपरीत राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहने से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों की समीक्षा के बाद उनके खिलाफ छह साल के निष्कासन की कार्रवाई की गई। पार्टी ने इस फैसले के जरिए संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखने और पदाधिकारियों से पार्टी की नीतियों के अनुरूप कार्य करने की अपेक्षा को रेखांकित किया है।
हालांकि, निष्कासन पत्र में शिकायतों की प्रकृति, उनकी जांच के तरीके या किसी विशेष घटना से जुड़े साक्ष्यों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में कार्रवाई के पीछे बताए गए आरोपों के संबंध में फिलहाल पार्टी की ओर से जारी आदेश ही प्रमुख सार्वजनिक जानकारी है।
अरशद राना का पक्ष सामने आना बाकी
इस पूरे मामले में अरशद राना की प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आ सकी है। उनकी ओर से निष्कासन की कार्रवाई, पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों या छह साल के प्रतिबंध को लेकर कोई आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष सामने आने के बाद मामले से जुड़ी स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल AIMIM के मुजफ्फरनगर महानगर अध्यक्ष मास्टर खालिद की ओर से जारी निष्कासन पत्र के माध्यम से पार्टी ने अरशद राना को छह साल के लिए संगठन से बाहर करने का फैसला लागू कर दिया है। अब इस मामले में अरशद राना की प्रतिक्रिया और पार्टी की ओर से आगे दी जाने वाली जानकारी पर नजर रहेगी।

