मुजफ्फरनगर। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी राशि 60.37 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक बैंक कर्मचारी और एक झोलाछाप डॉक्टर की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है।

पुलिस के अनुसार वर्ष 2019 में हरिद्वार निवासी सुमनलता ने एक निजी बीमा कंपनी में पॉलिसी ली थी। प्रीमियम भुगतान में दिक्कत के कारण पॉलिसी बंद होने पर कंपनी द्वारा उनकी मैच्योरिटी राशि 60.37 लाख रुपये का चेक जारी किया गया, जिसे ब्लू डार्ट कूरियर के माध्यम से उनके पते पर भेजा गया था।

जांच में सामने आया कि कूरियर से भेजा गया चेक रास्ते में ही संदिग्ध तरीके से गायब कर दिया गया। इसके बाद जालसाजों ने नाम में हेरफेर कर चेक को मुजफ्फरनगर के बिरालसी गांव की एक महिला के बैंक खाते में जमा करा दिया और धीरे-धीरे पूरी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकाल ली गई।
पीड़िता को जब रकम नहीं मिली तो उन्होंने बीमा कंपनी से शिकायत की, जिसके बाद आंतरिक जांच में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी मुजफ्फरनगर के निर्देश पर साइबर क्राइम थाना में मुकदमा दर्ज कर विशेष टीम गठित की गई।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 21 जून को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें प्रवीन पुत्र समय सिंह (ग्राम बिरालसी, थाना चरथावल), रामभूल पुत्र पूरण सिंह (पीएनबी बैंक कर्मचारी, ग्राम बिरालसी) तथा डॉ. दिलशाद पुत्र लियाकत अली (मोहल्ला शेखजादगान, चरथावल) शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो बैंक पासबुक और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मोबाइल की फॉरेंसिक जांच के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे लेन-देन नेटवर्क की जांच की जा रही है।
पूछताछ में सामने आया है कि बैंक कर्मी की मिलीभगत से खाते में नाम संशोधन कराकर रकम जमा कराई गई थी, जबकि अन्य आरोपियों ने पूरी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकाला।
इस सफल कार्रवाई पर एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने साइबर क्राइम टीम को 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। टीम में प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह, उपनिरीक्षक जय शर्मा, गौरव कुमार, मुख्य आरक्षी सोहनवीर सिंह और आरक्षी मोहित कुमार शामिल रहे।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बीमा, रिफंड, केवाईसी या लॉटरी से जुड़ी किसी भी कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और किसी भी स्थिति में ओटीपी, बैंक डिटेल या दस्तावेज साझा न करें।
