मुजफ्फरनगर/लखनऊ। जनपद के सरकारी अस्पतालों में तैनात होने के बावजूद वर्षों से ड्यूटी से नदारद चल रहे चिकित्सकों पर अब शासन का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। मुजफ्फरनगर के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से बिना लिखित अनुमति लंबे समय से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित चल रहे 10 चिकित्साधिकारियों का ब्योरा शासन स्तर पर तलब किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है। ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ जांच और नियमों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

हाल ही में जनपद में पूर्व में तैनात रहे एक चिकित्सक के खिलाफ शासन स्तर से बर्खास्तगी की कार्रवाई होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई है। अब वर्षों से अपनी तैनाती स्थल से गैरहाजिर चल रहे चिकित्सकों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। शासन की ओर से मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ आगे की कार्रवाई किए जाने की तैयारी है।

मुजफ्फरनगर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के सामने पहले से ही चिकित्सकों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के तहत स्वीकृत पदों के मुकाबले जिले में आधे चिकित्सक भी कार्यरत नहीं बताए जा रहे हैं। ऐसे में जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की जरूरत है, वहां तैनात चिकित्सकों का लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर समस्या बन रहा है।
2018 से ड्यूटी से गैरहाजिर हैं कई चिकित्सक
स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, जनपद के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात रहे कई चिकित्सक वर्ष 2018 से लेकर 2023 तक अलग-अलग अवधि से ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहे हैं। इनमें कुछ चिकित्सक ऐसे बताए गए हैं, जो कई वर्षों से अपनी तैनाती स्थल पर वापस नहीं लौटे हैं।
रिकॉर्ड के मुताबिक डॉ. परिधि सीएचसी खतौली से 1 मई 2018 से गैरहाजिर हैं। डॉ. कुनाल कुमार पीएचसी छपार से 21 मई 2018 से अनुपस्थित बताए गए हैं। डॉ. अवनी सीएचसी शाहपुर से 21 मई 2019 से गैरहाजिर चल रही हैं।
इसी तरह डॉ. निधि तोमर सीएचसी जानसठ से 15 अप्रैल 2020 से, जबकि डॉ. सुचित्रा सिंह भी सीएचसी जानसठ से 1 अप्रैल 2021 से अनुपस्थित बताई गई हैं। डॉ. श्रुति आर्य सीएचसी सिसौली से 28 जनवरी 2022 से और डॉ. वैशाली भारद्वाज सीएचसी बुढाना से 3 मार्च 2022 से गैरहाजिर हैं।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में डॉ. शशांक भी सीएचसी जानसठ से 21 मई 2022 से अनुपस्थित बताए गए हैं। डॉ. विशाल कांधवे सीएचसी जानसठ से 7 फरवरी 2023 से गैरहाजिर चल रहे हैं। वहीं डॉ. समीर आनंद के संबंध में पीएचसी बसेड़ा से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने की जानकारी दर्ज है।
डॉक्टरों की कमी के बीच लंबे समय की गैरहाजिरी बनी परेशानी
मुजफ्फरनगर के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पीएचसी और सीएचसी पर बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इन केंद्रों पर चिकित्सकों की उपलब्धता मरीजों के लिए प्राथमिक उपचार से लेकर गंभीर मामलों में शुरुआती चिकित्सा सुविधा तक बेहद महत्वपूर्ण होती है। पहले से ही स्वीकृत पदों के मुकाबले चिकित्सकों की संख्या कम होने के बीच यदि तैनात डॉक्टर भी लंबे समय तक ड्यूटी पर उपलब्ध न रहें तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।
विभागीय स्तर पर यह भी माना जाता है कि सभी प्रकार की अनुपस्थिति को अनधिकृत नहीं माना जा सकता। कई चिकित्सक उच्च शिक्षा यानी पीजी की पढ़ाई, प्रशिक्षण अथवा अन्य व्यक्तिगत कारणों से नियमानुसार अनुमति लेकर अवकाश पर जाते हैं। ऐसे मामलों में विभागीय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है। लेकिन बिना अनुमति या लिखित स्वीकृति के लंबे समय तक तैनाती स्थल से गायब रहने वाले चिकित्सकों का मामला अलग है।
स्वास्थ्य विभाग अब इसी आधार पर लंबे समय से अनुपस्थित चिकित्सकों का रिकॉर्ड शासन को उपलब्ध करा रहा है। संबंधित डॉक्टरों की अनुपस्थिति की अवधि, अनुमति से जुड़े दस्तावेज और विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी।
सीएमओ ने कहा, शासन को भेजी जा रही पूरी रिपोर्ट
मुख्य चिकित्साधिकारी, मुजफ्फरनगर के अनुसार जनपद में तैनात रहे कई चिकित्साधिकारी अनधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे हैं। शासन की ओर से ऐसे चिकित्सकों का ब्योरा मांगा गया है। विभाग की ओर से लंबे समय से गैरहाजिर चिकित्सकों से संबंधित पूरी रिपोर्ट तैयार कर शासन को उपलब्ध कराई जा रही है।
सीएमओ के अनुसार, शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में लंबे समय से ड्यूटी से नदारद चल रहे चिकित्सकों पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है।
एक डॉक्टर पर कार्रवाई के बाद बढ़ी हलचल
जनपद में पूर्व में तैनात रहे एक चिकित्सक के खिलाफ शासन स्तर से बर्खास्तगी की कार्रवाई किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग में इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। अब लंबे समय से गैरहाजिर अन्य चिकित्सकों के मामलों में भी शासन के रुख पर नजर है।
फिलहाल विभागीय रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की प्रक्रिया में है। रिपोर्ट की जांच और संबंधित चिकित्सकों के सेवा अभिलेखों के आधार पर यह तय होगा कि किन मामलों में कौन सी विभागीय कार्रवाई की जाती है। यदि कठोर कार्रवाई होती है तो इसका असर लंबे समय से खाली पड़े पदों और जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

